Passage 11.2
इमा आपः सर्वेषां भूतानां मधु । आसामपां सर्वाणि भूतानि मधु । यश्चायमास्वप्सु तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यश्चायमध्यात्मं रैतसस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मा । इदममृतमिदं ब्रह्मेदं सर्वम् ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
इमाः आपः सर्वेषाम् भूतानाम् मधु [सन्ति] । आसाम् अपाम् सर्वाणि भूतानि मधु [सन्ति] । आसु अप्सु यः च अयम् तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अध्यात्मम् यः च अयम् रैतसः तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अयम् एव सः [अस्ति], यः अयम् आत्मा [अस्ति] । इदम् अमृतम् [अस्ति]; इदम् ब्रह्म [अस्ति]; इदम् सर्वम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
ये जल सभी प्राणियों का मधु हैं और इन जलों के लिए सभी प्राणी मधु हैं। जो इन जलों में तेजोमय और अमृतमय पुरुष है तथा जो अपने भीतर रेतस् अर्थात् प्रजनन-रस में स्थित तेजोमय और अमृतमय पुरुष है, वही यह आत्मा है। यही अमृत है, यही ब्रह्म है और यही सब कुछ है।
English meaning
These waters are honey for all beings, and all beings are honey for these waters. The radiant, immortal person in these waters and the radiant, immortal person within the individual in the generative fluid are this very Self. This is the immortal; this is Brahman; this is everything.
व्याख्या
रैतस का सम्बन्ध रेतस् से है; उसे सामान्य चमक या मन में बदलने से देह-सम्बन्धी अर्थ छूट जाएगा। जल और प्रजनन-रस का यह सम्बन्ध प्राचीन ध्यान-विधान है, प्रजनन-चिकित्सा नहीं। मधु यहाँ पारस्परिक पोषण और सार का रूपक है।
Explanation
Raitasa derives from retas, generative fluid; replacing it with mind or generic radiance would erase the bodily correspondence. The pairing is contemplative, not reproductive medicine. Honey is a metaphor for reciprocal nourishment and essence.
संदर्भ
पृथिवी-शरीर के बाद जल और प्रजनन-रस का युग्म आता है।
Context
The earth/body pair is followed by waters and generative fluid.