Passage 11.5
अयमादित्यः सर्वेषां भूतानां मधु । अस्यादित्यस्य सर्वाणि भूतानि मधु । यश्चायमस्मिन्नादित्ये तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यश्चायमध्यात्मं चाक्षुषस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मा । इदममृतमिदं ब्रह्मेदं सर्वम् ॥ ५ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अयम् आदित्यः सर्वेषाम् भूतानाम् मधु [अस्ति] । अस्य आदित्यस्य सर्वाणि भूतानि मधु [सन्ति] । अस्मिन् आदित्ये यः च अयम् तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अध्यात्मम् यः च अयम् चाक्षुषः तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अयम् एव सः [अस्ति], यः अयम् आत्मा [अस्ति] । इदम् अमृतम् [अस्ति]; इदम् ब्रह्म [अस्ति]; इदम् सर्वम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
यह सूर्य सभी प्राणियों का मधु है और इस सूर्य के लिए सभी प्राणी मधु हैं। जो इस सूर्य में तेजोमय और अमृतमय पुरुष है तथा जो अपने भीतर दृष्टि के रूप में स्थित तेजोमय और अमृतमय पुरुष है, वही यह आत्मा है। यही अमृत है, यही ब्रह्म है और यही सब कुछ है।
English meaning
This sun is honey for all beings, and all beings are honey for this sun. The radiant, immortal person in this sun and the radiant, immortal person within the individual as sight are this very Self. This is the immortal; this is Brahman; this is everything.
व्याख्या
सूर्य का प्रकाश और आँख की देखने की शक्ति परस्पर जुड़े हैं। मधु का कथन इस उपयोगिता से आगे बढ़कर बाह्य और आन्तरिक पुरुष की एकता की ओर जाता है। मधु यहाँ पारस्परिक पोषण और सार का रूपक है।
Explanation
Sunlight and the eye’s ability to see are related. Calling them honey goes beyond usefulness toward the unity of their cosmic and individual person. Honey is a metaphor for reciprocal nourishment and essence.
संदर्भ
सूर्य और दृष्टि का सम्बन्ध पहले ब्राह्मणों के बाद मधु-विद्या में फिर आता है।
Context
The sun/sight correspondence returns in the honey teaching after its earlier appearances.