Passage 11.3
अयमग्निः सर्वेषां भूतानां मधु । अस्याग्नेः सर्वाणि भूतानि मधु । यश्चायमस्मिन्नग्नौ तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यश्चायमध्यात्मं वाङ्मयस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मा । इदममृतमिदं ब्रह्मेदं सर्वम् ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अयम् अग्निः सर्वेषाम् भूतानाम् मधु [अस्ति] । अस्य अग्नेः सर्वाणि भूतानि मधु [सन्ति] । अस्मिन् अग्नौ यः च अयम् तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अध्यात्मम् यः च अयम् वाङ्मयः तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अयम् एव सः [अस्ति], यः अयम् आत्मा [अस्ति] । इदम् अमृतम् [अस्ति]; इदम् ब्रह्म [अस्ति]; इदम् सर्वम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
यह अग्नि सभी प्राणियों का मधु है और इस अग्नि के लिए सभी प्राणी मधु हैं। जो इस अग्नि में तेजोमय और अमृतमय पुरुष है तथा जो अपने भीतर वाणी के रूप में स्थित तेजोमय और अमृतमय पुरुष है, वही यह आत्मा है। यही अमृत है, यही ब्रह्म है और यही सब कुछ है।
English meaning
This fire is honey for all beings, and all beings are honey for this fire. The radiant, immortal person in this fire and the radiant, immortal person within the individual as speech are this very Self. This is the immortal; this is Brahman; this is everything.
व्याख्या
वाङ्मय का अर्थ वाणी से बना या वाणीमय है। अग्नि और वाणी का वैदिक सम्बन्ध यहाँ दोनों को एक ही आत्मा की अभिव्यक्तियाँ बताने के लिए प्रयुक्त होता है। मधु यहाँ पारस्परिक पोषण और सार का रूपक है।
Explanation
Vangmaya means constituted by speech. The Vedic connection between fire and speech is used here to present both as expressions of the same Self. Honey is a metaphor for reciprocal nourishment and essence.
संदर्भ
अग्नि और व्यक्ति की वाणी को मधु-विद्या में जोड़ा जाता है।
Context
Fire is correlated with the individual’s speech in the honey teaching.