Passage 11.13
इदं मानुषं सर्वेषां भूतानां मधु । अस्य मानुषस्य सर्वाणि भूतानि मधु । यश्चायमस्मिन्मानुषे तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यश्चायमध्यात्मं मानुषस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मा । इदममृतमिदं ब्रह्मेदं सर्वम् ॥ १३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
इदम् मानुषम् सर्वेषाम् भूतानाम् मधु [अस्ति] । अस्य मानुषस्य सर्वाणि भूतानि मधु [सन्ति] । अस्मिन् मानुषे यः च अयम् तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अध्यात्मम् यः च अयम् मानुषः तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अयम् एव सः [अस्ति], यः अयम् आत्मा [अस्ति] । इदम् अमृतम् [अस्ति]; इदम् ब्रह्म [अस्ति]; इदम् सर्वम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
यह मनुष्य-समुदाय सभी प्राणियों का मधु है और इस मनुष्य-समुदाय के लिए सभी प्राणी मधु हैं। जो इस मनुष्य-समुदाय में तेजोमय और अमृतमय पुरुष है तथा जो अपने भीतर व्यक्तिगत मनुष्य के रूप में स्थित तेजोमय और अमृतमय पुरुष है, वही यह आत्मा है। यही अमृत है, यही ब्रह्म है और यही सब कुछ है।
English meaning
This humankind is honey for all beings, and all beings are honey for this humankind. The radiant, immortal person in this humankind and the radiant, immortal person within the individual as the individual human being are this very Self. This is the immortal; this is Brahman; this is everything.
व्याख्या
पहला मानुषम् सामूहिक मानव-जगत का और दूसरा मानुषः व्यक्ति का संकेत देता है। सब भूतों का उल्लेख मनुष्यों तक सीमित नहीं किया गया; मानव-जगत भी व्यापक पारस्परिकता का एक अंग है। मधु यहाँ पारस्परिक पोषण और सार का रूपक है।
Explanation
The first manusham points to the human world collectively and the second manushah to its individual expression. “All beings” is not narrowed to humans; humanity is one member of the wider reciprocity. Honey is a metaphor for reciprocal nourishment and essence.
संदर्भ
मधु-विद्या में सम्पूर्ण मनुष्य-समुदाय और व्यक्तिगत मानव का युग्म आता है।
Context
The honey teaching now pairs humankind as a whole with the individual human.