Passage 11.12
इदं सत्यं सर्वेषां भूतानां मधु । अस्य सत्यस्य सर्वाणि भूतानि मधु । यश्चायमस्मिन् सत्ये तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषो यश्चायमध्यात्मं सात्यस्तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषोऽयमेव स योऽयमात्मा । इदममृतमिदं ब्रह्मेदं सर्वम् ॥ १२ ॥
पदच्छेद
अन्वय
इदम् सत्यम् सर्वेषाम् भूतानाम् मधु [अस्ति] । अस्य सत्यस्य सर्वाणि भूतानि मधु [सन्ति] । अस्मिन् सत्ये यः च अयम् तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अध्यात्मम् यः च अयम् सात्यः तेजोमयः अमृतमयः पुरुषः [अस्ति], अयम् एव सः [अस्ति], यः अयम् आत्मा [अस्ति] । इदम् अमृतम् [अस्ति]; इदम् ब्रह्म [अस्ति]; इदम् सर्वम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
यह सत्य सभी प्राणियों का मधु है और इस सत्य के लिए सभी प्राणी मधु हैं। जो इस सत्य में तेजोमय और अमृतमय पुरुष है तथा जो अपने भीतर सत्य के आन्तरिक रूप में स्थित तेजोमय और अमृतमय पुरुष है, वही यह आत्मा है। यही अमृत है, यही ब्रह्म है और यही सब कुछ है।
English meaning
This truth is honey for all beings, and all beings are honey for this truth. The radiant, immortal person in this truth and the radiant, immortal person within the individual as the inward form of truth are this very Self. This is the immortal; this is Brahman; this is everything.
व्याख्या
सात्य सत्य से सम्बन्धित विशेषण है; इसे अलग देवता या साधारण व्यक्ति का नाम नहीं माना गया। प्राणियों और सत्य की पारस्परिकता को अंततः आत्मा-ब्रह्म की पहचान से जोड़ा गया है। मधु यहाँ पारस्परिक पोषण और सार का रूपक है।
Explanation
Satya, with a long initial vowel in the derivative adjective, denotes the person related to truth, not a separate proper name. The reciprocity of beings and truth culminates in the identification of Self and Brahman. Honey is a metaphor for reciprocal nourishment and essence.
संदर्भ
धर्म के बाद सत्य को बाह्य और आन्तरिक पक्षों में देखा जाता है।
Context
After dharma, truth is considered in cosmic and individual aspects.