Passage 44.14
अथैनमग्नये हरन्ति । तस्याग्निरेवाग्निर्भवति । समित्समित् । धूमो धूमः । अर्चिरर्चिः । अङ्गारा अङ्गाराः । विष्फुलिङ्गा विष्फुलिङ्गाः । तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ देवाः पुरुषं जुह्वति । तस्या आहुत्यै पुरुषो भास्वरवर्णः संभवति ॥ १४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ एनम् [मृतम्] अग्नये हरन्ति । तस्य अग्निः एव अग्निः भवति; समित् समित् [भवति]; धूमः धूमः [भवति]; अर्चिः अर्चिः [भवति]; अङ्गाराः अङ्गाराः [भवन्ति]; विष्फुलिङ्गाः विष्फुलिङ्गाः [भवन्ति] । तस्मिन् एतस्मिन् अग्नौ देवाः पुरुषम् जुह्वति; तस्याः आहुत्यै भास्वरवर्णः पुरुषः सम्भवति ।
हिन्दी अर्थ
“तब वे उसे अग्नि के पास ले जाते हैं। उस अवस्था में अग्नि ही अग्नि होती है; समिधा समिधा होती है; धुआँ धुआँ होता है; ज्वाला ज्वाला होती है; अंगारे अंगारे होते हैं; चिनगारियाँ चिनगारियाँ होती हैं। देवता इस अग्नि में मनुष्य की आहुति देते हैं। उस आहुति से दीप्तिमान वर्ण वाला पुरुष उत्पन्न होता है।”
English meaning
“Then they carry the person to the fire. Here fire itself is the fire; fuel is fuel; smoke is smoke; flame is flame; embers are embers; sparks are sparks. In this fire the gods offer the person. From that offering a person of radiant appearance arises.”
व्याख्या
छह समान-पदों की पुनरावृत्ति जानबूझकर है: अग्नि और उसके पाँच घटक। दीप्तिमान पुरुष का उदय पाठ की मरणोत्तर कल्पना है, भौतिक दहन का वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं।
Explanation
The six identical pairings are deliberate: fire and its five components. The emergence of a radiant person belongs to the text’s afterlife teaching, not a scientific conclusion about cremation.
संदर्भ
जन्म और जीवन के बाद दाह-संस्कार का चरण आता है। पहले रूपक बने अग्नि-अवयव यहाँ अपने वास्तविक नामों में लौटते हैं।
Context
After birth and life comes cremation. The components earlier mapped symbolically onto other things now appear under their literal names.