Passage 44.13
योषा वा अग्निर्गौतम । तस्या उपस्थ एव समित् । लोमानि धूमः । योनिरर्चिः । यदन्तः करोति तेऽङ्गाराः । अभिनन्दा विष्फुलिङ्गाः । तस्मिन्नेतस्मिन्नग्नौ देवा रेतो जुह्वति । तस्या आहुत्यै पुरुषः संभवति । स जीवति यावज्जीवति । अथ यदा म्रियते ॥ १३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
गौतम, योषा वा अग्निः [अस्ति] । तस्याः उपस्थः एव समित् [अस्ति]; लोमानि धूमः [सन्ति]; योनिः अर्चिः [अस्ति]; यत् अन्तः करोति, ते अङ्गाराः [सन्ति]; अभिनन्दाः विष्फुलिङ्गाः [सन्ति] । तस्मिन् एतस्मिन् अग्नौ देवाः रेतः जुह्वति; तस्याः आहुत्यै पुरुषः सम्भवति । सः यावत् जीवति [तावत्] जीवति; अथ यदा म्रियते [तदा उत्तरत्र उक्तम् भवति] ।
हिन्दी अर्थ
“गौतम, स्त्री अग्नि है। उसका जननेन्द्रिय-प्रदेश ही समिधा है; रोम धुआँ हैं; योनि ज्वाला है; भीतर किया जाने वाला प्रवेश अंगारे हैं; आनन्द के उद्गार चिनगारियाँ हैं। देवता इस अग्नि में वीर्य की आहुति देते हैं। उस आहुति से मनुष्य उत्पन्न होता है। वह जितना जीता है, उतना जीता है। फिर जब वह मरता है...”
English meaning
“Gautama, a woman is a fire. Her genital region is the fuel; the hair is the smoke; the vagina is the flame; the penetration performed within is the embers; expressions of pleasure are the sparks. In this fire the gods offer semen. From that offering a human being arises. That person lives for as long as they live. Then, when they die...”
व्याख्या
यौन शारीरिक बिम्ब स्पष्ट रखे गए हैं, क्योंकि जल से मानव-वाणी तक पूछा गया रूपान्तरण इसी जनन-क्रम पर निर्भर है। यह प्राचीन धार्मिक रूपक है, यौन आचरण का वर्तमान निर्देश नहीं।
Explanation
The sexual bodily imagery is retained explicitly because the transformation from water to a speaking person depends on this reproductive sequence. This is an ancient religious analogy, not a present-day instruction for sexual conduct.
संदर्भ
पाँचवीं अग्नि मानव जन्म पर शृंखला पूरी करती है। आखिरी अधूरा वाक्य अगले अन्त्येष्टि-प्रसंग से जुड़ता है।
Context
The fifth fire completes the sequence at human birth. The unfinished final clause leads directly into the funeral scene.