Passage 4.8
तदेतत्प्रेयः पुत्रात्प्रेयो वित्तात्प्रेयोऽन्यस्मात्सर्वस्मादन्तरतरं यदयमात्मा । स योऽन्यमात्मनः प्रियं ब्रुवाणं ब्रूयात्प्रियं रोत्स्यतीतीश्वरो ह तथैव स्यात् । आत्मानमेव प्रियमुपासीत । स य आत्मानमेव प्रियमुपास्ते न हास्य प्रियं प्रमायुकं भवति ॥ ८ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यत् अयम् आत्मा [अस्ति], तत् एतत् पुत्रात् प्रेयः, वित्तात् प्रेयः, अन्यस्मात् सर्वस्मात् प्रेयः अन्तरतरम् [अस्ति] । यः [आत्मप्रियवादी] आत्मनः अन्यम् प्रियम् ब्रुवाणम् [पुरुषम्] “[तव] प्रियम् रोत्स्यति” इति ब्रूयात्, सः ह [तथा वक्तुम्] ईश्वरः [अस्ति]; [तद् उक्तम्] तथा एव स्यात् । आत्मानम् एव प्रियम् उपासीत । यः आत्मानम् एव प्रियम् उपास्ते, अस्य प्रियम् न ह प्रमायुकम् भवति ।
हिन्दी अर्थ
यह आत्मा पुत्र से प्रियतर, धन से प्रियतर और अन्य सब से प्रियतर है, क्योंकि यह सबसे भीतर है। यदि कोई आत्मा से भिन्न किसी को प्रिय कहने वाले से कहे कि तुम्हारा प्रिय नष्ट हो जाएगा, तो ऐसा होना सम्भव है। इसलिए आत्मा को ही प्रिय मानकर उपासना करे। जो आत्मा को ही प्रिय मानकर उपासता है, उसका प्रिय नाशवान् नहीं होता।
English meaning
This self is dearer than a son, dearer than wealth and dearer than everything else, because it is more inward. If someone tells a person who calls something other than the self dear, “What you hold dear will perish,” that may indeed happen. One should therefore contemplate the self as dear. For one who contemplates the self as dear, what is dear does not perish.
व्याख्या
यह बाहरी प्रिय वस्तुओं और व्यक्तियों की नश्वरता के सामने आत्मा की स्थिरता का तर्क है। इसे दूसरों के प्रति उदासीनता या व्यक्तिगत अहंकार को सर्वोच्च रखने का आग्रह नहीं समझना चाहिए। रोत्स्यति का नष्ट होने वाला अर्थ संदर्भगत है और शब्द-समीक्षा चाहता है।
Explanation
The argument contrasts the perishing of external loved persons and things with the self’s stability. It should not be read as a demand for indifference to others or the supremacy of personal ego. The rendering of rotsyati as perishing is contextual and needs lexical review.
संदर्भ
आत्मा को सभी क्रियाओं का आधार कहने के बाद उसे प्रियता का सबसे भीतर का केंद्र बताया जाता है।
Context
After identifying the self as the basis of activities, the text makes it the inward centre of what is dear.