Passage 4.14
स नैव व्यभवत् । तच्छ्रेयो रूपमत्यसृजत धर्मम् । तदेतत्क्षत्रस्य क्षत्रं यद्धर्मः । तस्माद्धर्मात्परं नास्ति । अथो अबलीयान् बलीयांसमाशंसते धर्मेण । यथा राज्ञैवम् । यो वै स धर्मः सत्यं वै तत् । तस्मात्सत्यं वदन्तमाहुर्धर्मं वदतीति । धर्मं वा वदन्तं सत्यं वदतीति । एतद्ध्येवैतदुभयं भवति ॥ १४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः न एव व्यभवत् । तत् श्रेयः रूपम् धर्मम् अत्यसृजत । यत् धर्मः [अस्ति], तत् एतत् क्षत्रस्य क्षत्रम् [अस्ति] । तस्मात् धर्मात् परम् न अस्ति । अथ उ अबलीयान् धर्मेण बलीयांसम् आशंसते, यथा राज्ञा एवम् । यः वै सः धर्मः [अस्ति], तत् सत्यम् वै [अस्ति] । तस्मात् सत्यम् वदन्तम् धर्मम् वदति इति आहुः, धर्मम् वा वदन्तम् सत्यम् वदति इति [आहुः] । हि एतत् उभयम् एव एतत् भवति ।
हिन्दी अर्थ
फिर भी वह समर्थ नहीं हुआ। उसने उससे भी उत्कृष्ट रूप, धर्म, उत्पन्न किया। धर्म ही क्षत्र का क्षत्र है; इसलिए धर्म से ऊपर कुछ नहीं है। धर्म के द्वारा निर्बल भी बलवान् पर विजय की आशा करता है, जैसे राजा का सहारा लेकर। जो धर्म है, वही सत्य है। इसीलिए सत्य बोलने वाले को कहते हैं कि वह धर्म बोलता है, और धर्म बोलने वाले को कि वह सत्य बोलता है; ये दोनों वास्तव में एक ही हैं।
English meaning
Still it did not attain sufficient power. It brought forth a still superior form, dharma. Dharma is the ruling power of ruling power; there is nothing above it. Through dharma even the weaker person hopes to prevail over the stronger, as with the support of a king. What is dharma is truth. Hence people say of someone speaking truth, “That person speaks dharma,” and of someone speaking dharma, “That person speaks truth.” These two are indeed the same.
व्याख्या
धर्म यहाँ शक्ति को नियंत्रित करने वाला मानक है। निर्बल की आशा वाला वाक्य बताता है कि केवल बल का होना पर्याप्त वैधता नहीं। सत्य के साथ उसकी समानता इस प्रसंग का निष्कर्ष है; यह वर्तमान कानून का शब्दशः विवरण नहीं।
Explanation
Dharma here is a norm governing power. The weaker person’s hope indicates that force alone does not supply legitimacy. Its identification with truth concludes the passage; it is not a literal account of any present-day legal system.
संदर्भ
क्षत्र और सामाजिक समूहों के ऊपर धर्म का स्थान बताकर उत्पत्ति-क्रम एक नए स्तर पर पहुँचता है।
Context
The account reaches another level by placing dharma above ruling authority and the social groups.