Passage 4.3
स वै नैव रेमे । तस्मादेकाकी न रमते । स द्वितीयमैच्छत् । स हैतावानास यथा स्त्रीपुमांसौ सम्परिष्वक्तौ । स इममेवात्मानं द्वेधापातयत् । ततः पतिश्च पत्नी चाभवताम् । तस्मादिदमर्धबृगलमिव स्व इति ह स्माह याज्ञवल्क्यः । तस्मादयमाकाशः स्त्रिया पूर्यत एव । तां समभवत् । ततो मनुष्या अजायन्त ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः वै न एव रेमे । तस्मात् एकाकी न रमते । सः द्वितीयम् ऐच्छत् । यथा स्त्रीपुमांसौ सम्परिष्वक्तौ [स्तः], सः ह एतावान् आस । सः इमम् एव आत्मानम् द्वेधा अपातयत् । ततः पतिः च पत्नी च अभवताम् । तस्मात् इदम् [शरीरम्] स्वः [आत्मनः] अर्धबृगलम् इव [अस्ति] इति ह स्म याज्ञवल्क्यः आह । तस्मात् अयम् आकाशः स्त्रिया पूर्यते एव । ताम् समभवत् । ततः मनुष्याः अजायन्त ।
हिन्दी अर्थ
वह आनन्दित नहीं हुआ; इसलिए अकेला व्यक्ति रमण नहीं करता। उसने दूसरे की इच्छा की। वह उतना था जैसे स्त्री और पुरुष आलिंगन में हों। उसने इसी अपने रूप को दो भागों में विभक्त किया; तब पति और पत्नी हुए। याज्ञवल्क्य कहा करते थे: इसलिए यह अपना रूप मानो आधे दाने जैसा है। इसीलिए यह रिक्त स्थान स्त्री से पूरा होता है। वह उसके साथ संयुक्त हुआ और मनुष्य उत्पन्न हुए।
English meaning
It did not find delight; hence one alone does not delight. It desired a second. It was as large as a woman and man in an embrace. It divided its own form in two, and husband and wife came into being. Yajnavalkya used to say, “Thus one’s own form is like half of a split seed.” In this account, the space is filled by the woman. It united with her, and human beings were born.
व्याख्या
यह पुरुष-केंद्रित प्राचीन सृष्टिकथा है, जिसमें दाम्पत्य और जनन से मनुष्यजाति की उत्पत्ति समझाई गई है। इसे यह मानने का सार्वभौम नियम नहीं बनाया गया कि अविवाहित व्यक्ति अधूरा है या स्त्री किसी पुरुष की रिक्तता भरने के लिए अस्तित्व रखती है। अर्धबृगल शब्द का बीज या दाने का उपमान अनिश्चित होने से सावधानी से रखा गया है।
Explanation
This is an ancient, male-centred creation narrative explaining humankind through partnership and generation. It is not treated as a universal rule that an unmarried person is incomplete or that women exist to fill a man’s lack. The seed image for ardhabrigala is retained cautiously because the precise term is uncertain.
संदर्भ
भय का समाधान होने के बाद दूसरे की कामना से स्त्री-पुरुष की उत्पत्ति की कथा आती है।
Context
After fear has been resolved, the desire for another introduces the narrative origin of woman and man.