Passage 4.16
अथो अयं वा आत्मा सर्वेषां भूतानां लोकः । स यज्जुहोति यद्यजते तेन देवानां लोकः । अथ यदनुब्रूते तेन ऋषीणाम् । अथ यत्पितृभ्यो निपृणाति यत्प्रजामिच्छते तेन पितॄणाम् । अथ यन्मनुष्यान् वासयते यदेभ्योऽशनं ददाति तेन मनुष्याणाम् । अथ यत्पशुभ्यस्तृणोदकं विन्दति तेन पशूनाम् । यदस्य गृहेषु श्वापदा वयांस्या पिपीलिकाभ्य उपजीवन्ति तेन तेषां लोकः । यथा ह वै स्वाय लोकायारिष्टिमिच्छेत् । एवं हैवंविदे सर्वदा सर्वाणि भूतान्यरिष्टिमिच्छन्ति । तद्वा एतद्विदितं मीमांसितम् ॥ १६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ उ अयम् आत्मा सर्वेषाम् भूतानाम् लोकः वै [अस्ति] । सः यत् जुहोति, यत् यजते, तेन देवानाम् लोकः [अस्ति] । अथ यत् अनुब्रूते, तेन ऋषीणाम् [लोकः अस्ति] । अथ यत् पितृभ्यः निपृणाति, यत् प्रजाम् इच्छते, तेन पितॄणाम् [लोकः अस्ति] । अथ यत् मनुष्यान् वासयते, यत् एभ्यः अशनम् ददाति, तेन मनुष्याणाम् [लोकः अस्ति] । अथ यत् पशुभ्यः तृणोदकम् विन्दति, तेन पशूनाम् [लोकः अस्ति] । यत् अस्य गृहेषु आ पिपीलिकाभ्यः श्वापदाः वयांसि उपजीवन्ति, तेन तेषाम् लोकः [अस्ति] । यथा ह वै स्वाय लोकाय अरिष्टिम् इच्छेत्, एवम् ह एवंविदे सर्वदा सर्वाणि भूतानि अरिष्टिम् इच्छन्ति । तत् वै एतत् विदितम् मीमांसितम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
यह आत्मा सभी प्राणियों का लोक है। वह जो आहुति देता और यज्ञ करता है, उससे देवताओं का लोक है; जो वेद का अनुशीलन करता है, उससे ऋषियों का। जो पितरों को अर्पण करता और सन्तान चाहता है, उससे पितरों का लोक है। जो मनुष्यों को निवास देता और भोजन कराता है, उससे मनुष्यों का; जो पशुओं के लिए घास और जल जुटाता है, उससे पशुओं का। उसके घर में रहने वाले जंगली जीव, पक्षी और चींटियों तक के प्राणी उससे जीविका पाते हैं; इसलिए वह उनका लोक है। जैसे कोई अपने लोक की अक्षति चाहता है, वैसे ही सभी प्राणी ऐसे ज्ञाता की सदा अक्षति चाहते हैं। यह जाना और विचार किया गया विषय है।
English meaning
This self is a world for all beings. Through offering and sacrifice it is a world for the gods; through Vedic recitation, for the seers; through offerings to ancestors and the desire for offspring, for the ancestors. Through lodging people and giving them food, it is a world for humans; through obtaining grass and water for animals, for animals. Wild creatures, birds and beings down to ants live from what is in its household, and so it is their world. Just as one wishes one’s own world to remain unharmed, all beings always wish such a knower to remain unharmed. This is something known and considered.
व्याख्या
लोक यहाँ केवल मृत्यु के बाद की जगह नहीं, जीविका और आश्रय का क्षेत्र भी है। देवता, ऋषि, पितर, अतिथि, पशु और छोटे जीव एक आश्रय-जाल में आते हैं। सभी प्राणियों की शुभकामना का फल-वाक्य पोषण की परस्परता की प्रशंसा है, किसी के कभी हानि न होने की गारंटी नहीं।
Explanation
Loka here is not only a place after death; it is also a sphere of livelihood and shelter. Gods, seers, ancestors, guests, animals and small creatures belong to a network of support. The promise of all beings’ goodwill praises reciprocal nourishment, rather than guaranteeing that harm can never occur.
संदर्भ
आत्मा को अपना लोक कहने के बाद उसे दूसरों के आश्रय के रूप में देखा जाता है।
Context
After the self is called one’s own world, it is considered as a dwelling and support for others.