Passage 4.13
स नैव व्यभवत् । स शौद्रं वर्णमसृजत पूषणम् । इयं वै पूषा । इयं हीदं सर्वं पुष्यति यदिदं किञ्च ॥ १३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः न एव व्यभवत् । सः शौद्रम् वर्णम् पूषणम् असृजत । इयम् वै पूषा [अस्ति] । हि इयम् यत् इदम् किञ्च [अस्ति], इदम् सर्वम् पुष्यति ।
हिन्दी अर्थ
फिर भी वह समर्थ नहीं हुआ। उसने शूद्र वर्ण, पूषन्, उत्पन्न किया। यह पृथिवी ही पूषन् है, क्योंकि यह जो कुछ भी है, उस सबका पोषण करती है।
English meaning
Still it did not attain sufficient power. It created the shudra class as Pushan. This earth is Pushan, for it nourishes everything that exists here.
व्याख्या
पोषण की क्रिया पूषन् नाम की व्याख्या करती है। वर्ण का उल्लेख स्रोत में स्पष्ट है और हटाया नहीं गया, लेकिन उसे जन्माधारित हीनता या सेवा के अनिवार्य बन्धन के समर्थन में नहीं बदला गया है।
Explanation
Nourishing explains the name Pushan. The explicit reference to varna is retained rather than erased, but it is not converted into support for inherited inferiority or compulsory service.
संदर्भ
सामाजिक उत्पत्ति-क्रम में पूषन् और पृथिवी का पोषण शूद्र वर्ण से जोड़ा जाता है।
Context
The account of social origins links the nourishment of Pushan and earth with the shudra class.