Passage 19.9
य आदित्ये तिष्ठन्नादित्यादन्तरो यमादित्यो न वेद यस्यादित्यः शरीरं य आदित्यमन्तरो यमयत्येष त आत्मान्तर्याम्यमृतः ॥ ९ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यः आदित्ये तिष्ठन् आदित्यात् अन्तरः [अस्ति], यम् आदित्यः न वेद, यस्य आदित्यः शरीरम् [अस्ति], यः अन्तरः आदित्यम् यमयति, एषः ते आत्मा अन्तर्यामी अमृतः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जो सूर्य में स्थित है, सूर्य के भीतर है, जिसका ज्ञान सूर्य को नहीं है, जिसका शरीर सूर्य है और जो सूर्य को भीतर से नियन्त्रित करता है, वही तुम्हारा आत्मा, अमर अन्तर्यामी है।
English meaning
The one who stands in the sun, who is within the sun, whom the sun does not know, whose body is constituted by the sun, and who rules the sun from within: that is your Self, the immortal inner ruler.
व्याख्या
सूर्य देखने में प्रकाश देता है, फिर भी भीतर के नियन्ता का ज्ञान सूर्य की अपनी शक्ति नहीं कहा गया। प्रकाशमान वस्तु और ज्ञाता अलग स्तर हैं।
Explanation
The sun provides visible light, yet does not thereby know its inward ruler. Luminosity and the knowing subject are not identical categories.
संदर्भ
अन्तर्यामी-क्रम में अब सूर्य का वर्णन है।
Context
The inner-ruler sequence now concerns the sun.