Passage 19.19
यः श्रोत्रे तिष्ठञ्छ्रोत्रादन्तरो यं श्रोत्रं न वेद यस्य श्रोत्रं शरीरं यः श्रोत्रमन्तरो यमयत्येष त आत्मान्तर्याम्यमृतः ॥ १९ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यः श्रोत्रे तिष्ठन् श्रोत्रात् अन्तरः [अस्ति], यम् श्रोत्रम् न वेद, यस्य श्रोत्रम् शरीरम् [अस्ति], यः अन्तरः श्रोत्रम् यमयति, एषः ते आत्मा अन्तर्यामी अमृतः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जो कान में स्थित है, कान के भीतर है, जिसका ज्ञान कान को नहीं है, जिसका शरीर कान है और जो कान को भीतर से नियन्त्रित करता है, वही तुम्हारा आत्मा, अमर अन्तर्यामी है।
English meaning
The one who stands in hearing, who is within hearing, whom hearing does not know, whose body is constituted by hearing, and who rules hearing from within: that is your Self, the immortal inner ruler.
व्याख्या
श्रवण का विषय शब्द है, पर सुनने का अन्तःआधार कोई अतिरिक्त सुनी जाने वाली ध्वनि नहीं है।
Explanation
Hearing has sound as its object, but its inward ground is not one additional sound to be heard.
संदर्भ
अन्तर्यामी-क्रम में अब कान का वर्णन है।
Context
The inner-ruler sequence now concerns hearing.