Passage 19.13
यस्तमसि तिष्ठंस्तमसोऽन्तरो यं तमो न वेद यस्य तमः शरीरं यस्तमोऽन्तरो यमयत्येष त आत्मान्तर्याम्यमृतः ॥ १३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यः तमसि तिष्ठन् तमसः अन्तरः [अस्ति], यम् तमः न वेद, यस्य तमः शरीरम् [अस्ति], यः अन्तरः तमः यमयति, एषः ते आत्मा अन्तर्यामी अमृतः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जो अन्धकार में स्थित है, अन्धकार के भीतर है, जिसका ज्ञान अन्धकार को नहीं है, जिसका शरीर अन्धकार है और जो अन्धकार को भीतर से नियन्त्रित करता है, वही तुम्हारा आत्मा, अमर अन्तर्यामी है।
English meaning
The one who stands in darkness, who is within darkness, whom darkness does not know, whose body is constituted by darkness, and who rules darkness from within: that is your Self, the immortal inner ruler.
व्याख्या
अन्धकार को भी बाहर नहीं छोड़ा गया। कथन अन्तर्यामी को केवल उजाले या दृश्य वस्तुओं तक सीमित नहीं करता।
Explanation
Darkness is not excluded. The ruler’s scope is not restricted to illumination or visible objects.
संदर्भ
अन्तर्यामी-क्रम में अब अन्धकार का वर्णन है।
Context
The inner-ruler sequence now concerns darkness.