Passage 19.11
यश्चन्द्रतारके तिष्ठञ्चन्द्रतारकादन्तरो यं चन्द्रतारकं न वेद यस्य चन्द्रतारकं शरीरं यश्चन्द्रतारकमन्तरो यमयत्येष त आत्मान्तर्याम्यमृतः ॥ ११ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यः चन्द्रतारके तिष्ठन् चन्द्रतारकात् अन्तरः [अस्ति], यम् चन्द्रतारकम् न वेद, यस्य चन्द्रतारकम् शरीरम् [अस्ति], यः अन्तरः चन्द्रतारकम् यमयति, एषः ते आत्मा अन्तर्यामी अमृतः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जो चन्द्रमा और तारे में स्थित है, चन्द्रमा और तारे के भीतर है, जिसका ज्ञान चन्द्रमा और तारे को नहीं है, जिसका शरीर चन्द्रमा और तारे है और जो चन्द्रमा और तारे को भीतर से नियन्त्रित करता है, वही तुम्हारा आत्मा, अमर अन्तर्यामी है।
English meaning
The one who stands in the moon and stars, who is within the moon and stars, whom the moon and stars do not know, whose body is constituted by the moon and stars, and who rules the moon and stars from within: that is your Self, the immortal inner ruler.
व्याख्या
मूल का चन्द्रतारकम् चन्द्रमा और तारों का सामूहिक नपुंसक पद है। रात्रि का प्रकाश-जगत् भी अन्तर्यामी की व्यापकता में सम्मिलित है।
Explanation
The Sanskrit uses a neuter collective for moon and stars. The luminous night-world is included in the ruler’s scope.
संदर्भ
अन्तर्यामी-क्रम में अब चन्द्रमा और तारे का वर्णन है।
Context
The inner-ruler sequence now concerns the moon and stars.