Passage 19.3
यः पृथिव्यां तिष्ठन् पृथिव्या अन्तरो यं पृथिवी न वेद यस्य पृथिवी शरीरं यः पृथिवीमन्तरो यमयत्येष त आत्मान्तर्याम्यमृतः ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यः पृथिव्याम् तिष्ठन् पृथिव्याः अन्तरः [अस्ति], यम् पृथिवी न वेद, यस्य पृथिवी शरीरम् [अस्ति], यः अन्तरः पृथिवीम् यमयति, एषः ते आत्मा अन्तर्यामी अमृतः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जो पृथिवी में स्थित है, पृथिवी के भीतर है, जिसका ज्ञान पृथिवी को नहीं है, जिसका शरीर पृथिवी है और जो पृथिवी को भीतर से नियन्त्रित करता है, वही तुम्हारा आत्मा, अमर अन्तर्यामी है।
English meaning
The one who stands in earth, who is within earth, whom earth does not know, whose body is constituted by earth, and who rules earth from within: that is your Self, the immortal inner ruler.
व्याख्या
स्थूल पृथिवी भी अपने भीतर के आधार को स्वतः नहीं जानती। शरीर कहने से पृथिवी अन्तर्यामी की अभिव्यक्ति बनती है, उसके बराबर सीमित वस्तु नहीं।
Explanation
Even earth does not know its inward ground. Calling it a body makes earth an expression of the ruler, not a limit enclosing that ruler.
संदर्भ
अन्तर्यामी-क्रम में अब पृथिवी का वर्णन है।
Context
The inner-ruler sequence now concerns earth.