Passage 19.7
यो वायौ तिष्ठन् वायोरन्तरो यं वायुर्न वेद यस्य वायुः शरीरं यो वायुमन्तरो यमयत्येष त आत्मान्तर्याम्यमृतः ॥ ७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यः वायौ तिष्ठन् वायोः अन्तरः [अस्ति], यम् वायुः न वेद, यस्य वायुः शरीरम् [अस्ति], यः अन्तरः वायुम् यमयति, एषः ते आत्मा अन्तर्यामी अमृतः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जो वायु में स्थित है, वायु के भीतर है, जिसका ज्ञान वायु को नहीं है, जिसका शरीर वायु है और जो वायु को भीतर से नियन्त्रित करता है, वही तुम्हारा आत्मा, अमर अन्तर्यामी है।
English meaning
The one who stands in wind, who is within wind, whom wind does not know, whose body is constituted by wind, and who rules wind from within: that is your Self, the immortal inner ruler.
व्याख्या
सूत्र के रूप में बताई गई वायु स्वयं भी अन्तर्यामी से नियन्त्रित है। इससे सूत्र और अन्तर्यामी को बिना भेद एक ही स्तर पर रखने से रोका जाता है।
Explanation
Wind, just identified as the binding thread, is itself governed from within. The passage distinguishes the thread from the inner ruler.
संदर्भ
अन्तर्यामी-क्रम में अब वायु का वर्णन है।
Context
The inner-ruler sequence now concerns wind.