Passage 26.9
स यथा शङ्खस्य ध्मायमानस्य न बाह्याञ्छब्दाञ्छक्नुयाद्ग्रहणाय । शङ्खस्य तु ग्रहणेन शङ्खध्मस्य वा शब्दो गृहीतः ॥ ९ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः [दृष्टान्तः]—यथा ध्मायमानस्य शङ्खस्य बाह्यान् शब्दान् [कश्चित्] ग्रहणाय न शक्नुयात्; शङ्खस्य तु ग्रहणेन, शङ्खध्मस्य वा [ग्रहणेन], शब्दः गृहीतः [भवति] ।
हिन्दी अर्थ
जैसे बजते हुए शंख के बाहरी शब्दों को अलग से पकड़ना सम्भव नहीं, पर शंख को अथवा शंख के फूँके जाने को पकड़ने से उसका शब्द पकड़ लिया जाता है।
English meaning
As one cannot grasp the outward sounds of a sounding conch separately, but by grasping the conch or the blowing of the conch its sound is grasped.
व्याख्या
अलग-अलग सुनाई देने वाले शब्दों का ग्रहण उनके आधार से जुड़ा है। यह आत्मा और विभिन्न अनुभवों के सम्बन्ध की उपमा है; ध्वनि-विज्ञान का पूर्ण सिद्धान्त नहीं।
Explanation
Apprehension of separate sounds is related to their source. The image illustrates the Self and diverse experiences, not a complete theory of acoustics.
संदर्भ
शंख का दृष्टान्त ध्वनियों और उनके आधार को जोड़ता है।
Context
The conch illustration relates sounds to their basis.