Passage 26.12
स यथा सर्वासामपां समुद्र एकायनम् । एवं सर्वेषां स्पर्शानां त्वगेकायनम् । एवं सर्वेषां गन्धानां नासिके एकायनम् । एवं सर्वेषां रसानां जिह्वैकायनम् । एवं सर्वेषां रूपाणां चक्षुरेकायनम् । एवं सर्वेषं शब्दानां श्रोत्रमेकायनम् । एवं सर्वेषां संकल्पानां मन एकायनम् । एवं सर्वासां विद्यानां हृदयमेकायनम् । एवं सर्वेषां कर्मणां हस्तावेकायनम् । एवं सर्वेषामानन्दानामुपस्थ एकायनम् । एवं सर्वेषां विसर्गाणां पायुरेकायनम् । एवं सर्वेषामध्वनां पादावेकायनम् । एवं सर्वेषां वेदानां वागेकायनम् ॥ १२ ॥
पदच्छेद
हिन्दी अर्थ
जैसे सभी जलों का एक आश्रय समुद्र है, वैसे सभी स्पर्शों का त्वचा, सभी गन्धों का दोनों नासिकाएँ, सभी रसों का जीभ, सभी रूपों का आँख, सभी शब्दों का कान, सभी संकल्पों का मन, सभी विद्याओं का हृदय, सभी कर्मों का दोनों हाथ, सभी आनन्दों का जननेन्द्रिय, सभी विसर्जनों का गुदा, सभी मार्गों का दोनों पैर और सभी वेदों का वाणी एक आश्रय है।
English meaning
As the ocean is the single meeting-place of all waters, so skin is that of all touches, the nostrils of all smells, the tongue of all tastes, the eye of all forms, the ear of all sounds, mind of all intentions, the heart of all kinds of knowledge, the hands of all actions, the genital organ of all pleasures, the anus of all discharges, the feet of all paths and speech of all Vedas.
व्याख्या
जननेन्द्रिय और विसर्जन सहित पूरी ऐतिहासिक इन्द्रिय-क्रिया सूची रखी गई है। सभी आनन्दों का जननेन्द्रिय में आश्रय इस रूपक की काम-सुख सम्बन्धी भाषा है, सम्पूर्ण सुख का आधुनिक मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त नहीं।
Explanation
The full historical list of faculties and functions includes sexuality and excretion. Locating all pleasures in the genital organ belongs to the image’s language of sexual pleasure, not a modern psychological theory of all happiness.
संदर्भ
अनेक अनुभवों के एक आश्रय में समावेश की तेरह उपमाएँ हैं।
Context
Thirteen correspondences illustrate diverse experiences converging in a single locus.