Shloka 10.1
श्रीभगवानुवाच भूय एव महाबाहो शृणु मे परमं वचः । यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥१०-१॥
पदच्छेद
अन्वय
श्रीभगवान् उवाच-महाबाहो, भूयः एव मे परमम् वचः शृणु, यत् अहम् ते प्रीयमाणाय हितकाम्यया वक्ष्यामि ।
हिन्दी अर्थ
श्रीभगवान ने कहा: महाबाहु, मेरी परम बात फिर सुनो। तुम प्रेम से सुनते हो, इसलिए तुम्हारे हित की इच्छा से मैं इसे बताऊँगा।
English meaning
The Lord says: Mighty-armed one, listen again to my highest teaching. Because you receive it with affection, I will speak with your welfare in view.
प्रसंग
कृष्ण अर्जुन के हित के लिए अपनी बात आगे बढ़ाते हैं।
सरल व्याख्या
बार-बार कहना स्नेह से जुड़ा है; विषय को और खोलने की तैयारी है।
Context
Krishna continues his teaching out of concern for Arjuna's welfare.
Simple explanation
The renewed teaching is linked to care, preparing to unfold the subject more fully.