Passage 14.12
याज्ञवल्क्येति होवाच यत्रायं पुरुषो म्रियते । किमेनं न जहातीति । नामेति । अनन्तं वै नामानन्ता विश्वे देवाः । अनन्तमेव स तेन लोकं जयति ॥ १२ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[आर्तभागः] ह उवाच—याज्ञवल्क्य, यत्र अयम् पुरुषः म्रियते, एनम् किम् न जहाति इति । [याज्ञवल्क्यः आह—] नाम [न जहाति] इति । वै नाम अनन्तम् [अस्ति]; विश्वे देवाः अनन्ताः [सन्ति] । सः तेन अनन्तम् एव लोकम् जयति ।
हिन्दी अर्थ
आर्तभाग ने कहा: याज्ञवल्क्य, जब यह पुरुष मरता है, तो उसे क्या नहीं छोड़ता? नाम। नाम अनन्त है और विश्वेदेव अनन्त हैं। उसके द्वारा वह अनन्त लोक जीतता है।
English meaning
Artabhaga said, “Yajnavalkya, when this person dies, what does not leave him?” “His name. Name is endless, and the All-gods are endless. Through it he wins an endless world.”
व्याख्या
नाम शरीर की मृत्यु के बाद भी पहचान और कथन में रह सकता है। पाठ इस सीमित अनुभव को नाम और देवताओं की अनन्तता के व्यापक उपासना-विचार से जोड़ता है।
Explanation
A name can remain in identification and speech after bodily death. The text connects this observation with a wider contemplation of the boundlessness of names and deities.
संदर्भ
प्राणों के प्रश्न के बाद व्यक्ति के बचे रहने वाले नाम पर बात आती है।
Context
After the vital powers, the discussion turns to the remaining name.