Passage 14.1
अथ हैनं जारत्कारव आर्तभागः पप्रच्छ । याज्ञवल्क्येति होवाच कति ग्रहाः कत्यतिग्रहा इति । अष्टौ ग्रहा अष्टावतिग्रहा इति । ये तेऽष्टौ ग्रहा अष्टावतिग्रहाः कतमे त इति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ ह जारत्कारवः आर्तभागः एनम् पप्रच्छ । [सः] ह उवाच—याज्ञवल्क्य, ग्रहाः कति [सन्ति], अतिग्रहाः कति [सन्ति] इति । [याज्ञवल्क्यः आह—] ग्रहाः अष्टौ [सन्ति]; अतिग्रहाः अष्टौ [सन्ति] इति । [आर्तभागः पप्रच्छ—] ये ते अष्टौ ग्रहाः अष्टौ अतिग्रहाः [सन्ति], ते कतमे [सन्ति] इति ।
हिन्दी अर्थ
तब जरत्कारु के वंशज आर्तभाग ने पूछा: याज्ञवल्क्य, ग्रह कितने हैं और अतिग्रह कितने? आठ ग्रह और आठ अतिग्रह। जो ये आठ ग्रह और आठ अतिग्रह हैं, वे कौन हैं?
English meaning
Then Artabhaga of the Jaratkaru lineage asked, “Yajnavalkya, how many graspers are there, and how many over-graspers?” “Eight graspers and eight over-graspers.” “Which are those eight and eight?”
व्याख्या
ग्रह यहाँ ज्योतिषीय ग्रह नहीं, पकड़ने वाली शक्ति है। अतिग्रह वह विषय है जो उस शक्ति को भी अपने अधीन कर लेता है।
Explanation
Graha here is a “grasper,” not an astrological planet. An atigraha is what in turn seizes or governs the grasping faculty.
संदर्भ
आर्तभाग चर्चा को इन्द्रियों और उनके विषयों के बन्धन की ओर मोड़ते हैं।
Context
Artabhaga turns the discussion toward faculties and their objects.