Passage 10.6
ब्रह्म तं परादाद्योऽन्यत्रात्मनो ब्रह्म वेद । क्षत्रं तं परादाद्योऽन्यत्रात्मनः क्षत्रं वेद । लोकास्तं परादुर्योऽन्यत्रात्मनो लोकान् वेद । देवास्तं परादुर्योऽन्यत्रात्मनो देवान् वेद । भूतानि तं परादुर्योऽन्यत्रात्मनो भूतानि वेद । सर्वं तं परादाद्योऽन्यत्रात्मनः सर्वं वेद । इदं ब्रह्मेदं क्षत्रमिमे लोका इमे देवा इमानि भूतानीदं सर्वं यदयमात्मा ॥ ६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यः आत्मनः अन्यत्र ब्रह्म वेद, तम् ब्रह्म परादात् । यः आत्मनः अन्यत्र क्षत्रम् वेद, तम् क्षत्रम् परादात् । यः आत्मनः अन्यत्र लोकान् वेद, तम् लोकाः परादुः । यः आत्मनः अन्यत्र देवान् वेद, तम् देवाः परादुः । यः आत्मनः अन्यत्र भूतानि वेद, तम् भूतानि परादुः । यः आत्मनः अन्यत्र सर्वम् वेद, तम् सर्वम् परादात् । इदम् ब्रह्म, इदम् क्षत्रम्, इमे लोकाः, इमे देवाः, इमानि भूतानि, इदम् सर्वम् [अस्ति] यत् अयम् आत्मा [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जो ब्राह्मण-शक्ति को आत्मा से अलग जानता है, ब्राह्मण-शक्ति उसे परे कर देती है। जो क्षत्र-शक्ति को आत्मा से अलग जानता है, क्षत्र-शक्ति उसे परे कर देती है। जो लोकों को आत्मा से अलग जानता है, लोक उसे परे कर देते हैं। जो देवताओं को आत्मा से अलग जानता है, देवता उसे परे कर देते हैं। जो प्राणियों को आत्मा से अलग जानता है, प्राणी उसे परे कर देते हैं। जो सब कुछ आत्मा से अलग जानता है, सब कुछ उसे परे कर देता है। यह ब्राह्मण-शक्ति, यह क्षत्र-शक्ति, ये लोक, ये देवता, ये प्राणी और यह सब कुछ, यही यह आत्मा है।
English meaning
The priestly order rejects one who knows it as separate from the Self. Ruling power rejects one who knows it as separate from the Self. The worlds reject one who knows them as separate from the Self. The gods reject one who knows them as separate from the Self. Beings reject one who knows them as separate from the Self. Everything rejects one who knows it as separate from the Self. This priestly order, this ruling power, these worlds, these gods, these beings and all this are this very Self.
व्याख्या
परे कर देने की भाषा वस्तुओं को आत्मा से पूर्णतः असम्बद्ध मानने की विफलता बताती है। अंत की छह मदें किसी सामाजिक समूह को दूसरों से श्रेष्ठ घोषित नहीं करतीं; वे सभी को आत्मा से जोड़ती हैं।
Explanation
The language of rejection depicts the failure of treating things as wholly unrelated to the Self. The concluding sixfold list does not elevate one social group over another; it relates every listed domain to the Self.
संदर्भ
प्रियता के आधार के बाद अलगाव की दृष्टि और आत्मा में समावेश का कथन आता है।
Context
The inquiry into dearness is followed by a contrast between separateness and inclusion in the Self.