Passage 10.5
स होवाच न वा अरे पत्युः कामाय पतिः प्रियो भवत्यात्मनस्तु कामाय पतिः प्रियो भवति । न वा अरे जायायै कामाय जाया प्रिया भवत्यात्मनस्तु कामाय जाया प्रिया भवति । न वा अरे पुत्राणां कामाय पुत्राः प्रिया भवन्त्यात्मनस्तु कामाय पुत्राः प्रिया भवन्ति । न वा अरे वित्तस्य कामाय वित्तं प्रियं भवत्यात्मनस्तु कामाय वित्तं प्रियं भवति । न वा अरे ब्रह्मणः कामाय ब्रह्म प्रियं भवत्यात्मनस्तु कामाय ब्रह्म प्रियं भवति । न वा अरे क्षत्रस्य कामाय क्षत्रं प्रियं भवत्यात्मनस्तु कामाय क्षत्रं प्रियं भवति । न वा अरे लोकानां कामाय लोकाः प्रिया भवन्त्यात्मनस्तु कामाय लोकाः प्रिया भवन्ति । न वा अरे देवानां कामाय देवाः प्रिया भवन्त्यात्मनस्तु कामाय देवाः प्रिया भवन्ति । न वा अरे भूतानां कामाय भूतानि प्रियाणि भवन्त्यात्मनस्तु कामाय भूतानि प्रियाणि भवन्ति । न वा अरे सर्वस्य कामाय सर्वं प्रियं भवत्यात्मनस्तु कामाय सर्वं प्रियं भवति । आत्मा वा अरे द्रष्टव्यः श्रोतव्यो मन्तव्यो निदिध्यासितव्यो मैत्रेयि । आत्मनो वा अरे दर्शनेन श्रवणेन मत्या विज्ञानेनेदं सर्वं विदितम् ॥ ५ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः ह उवाच-अरे, पत्युः कामाय पतिः न वा प्रियः भवति; आत्मनः तु कामाय पतिः प्रियः भवति । अरे, जायायै कामाय जाया न वा प्रिया भवति; आत्मनः तु कामाय जाया प्रिया भवति । अरे, पुत्राणाम् कामाय पुत्राः न वा प्रियाः भवन्ति; आत्मनः तु कामाय पुत्राः प्रियाः भवन्ति । अरे, वित्तस्य कामाय वित्तम् न वा प्रियम् भवति; आत्मनः तु कामाय वित्तम् प्रियम् भवति । अरे, ब्रह्मणः कामाय ब्रह्म न वा प्रियम् भवति; आत्मनः तु कामाय ब्रह्म प्रियम् भवति । अरे, क्षत्रस्य कामाय क्षत्रम् न वा प्रियम् भवति; आत्मनः तु कामाय क्षत्रम् प्रियम् भवति । अरे, लोकानाम् कामाय लोकाः न वा प्रियाः भवन्ति; आत्मनः तु कामाय लोकाः प्रियाः भवन्ति । अरे, देवानाम् कामाय देवाः न वा प्रियाः भवन्ति; आत्मनः तु कामाय देवाः प्रियाः भवन्ति । अरे, भूतानाम् कामाय भूतानि न वा प्रियाणि भवन्ति; आत्मनः तु कामाय भूतानि प्रियाणि भवन्ति । अरे, सर्वस्य कामाय सर्वम् न वा प्रियम् भवति; आत्मनः तु कामाय सर्वम् प्रियम् भवति । मैत्रेयि, अरे, आत्मा वा द्रष्टव्यः श्रोतव्यः मन्तव्यः निदिध्यासितव्यः [अस्ति] । अरे, आत्मनः दर्शनेन श्रवणेन मत्या विज्ञानेन वा इदम् सर्वम् विदितम् [भवति] ।
हिन्दी अर्थ
उन्होंने कहा: प्रिय, पति के लिए पति प्रिय नहीं होता है; आत्मा के लिए ही पति प्रिय होता है। प्रिय, पत्नी के लिए पत्नी प्रिय नहीं होती है; आत्मा के लिए ही पत्नी प्रिय होती है। प्रिय, पुत्रों के लिए पुत्र प्रिय नहीं होते हैं; आत्मा के लिए ही पुत्र प्रिय होते हैं। प्रिय, धन के लिए धन प्रिय नहीं होता है; आत्मा के लिए ही धन प्रिय होता है। प्रिय, ब्राह्मण-शक्ति के लिए ब्राह्मण-शक्ति प्रिय नहीं होती है; आत्मा के लिए ही ब्राह्मण-शक्ति प्रिय होती है। प्रिय, क्षत्र-शक्ति के लिए क्षत्र-शक्ति प्रिय नहीं होती है; आत्मा के लिए ही क्षत्र-शक्ति प्रिय होती है। प्रिय, लोकों के लिए लोक प्रिय नहीं होते हैं; आत्मा के लिए ही लोक प्रिय होते हैं। प्रिय, देवताओं के लिए देवता प्रिय नहीं होते हैं; आत्मा के लिए ही देवता प्रिय होते हैं। प्रिय, प्राणियों के लिए प्राणी प्रिय नहीं होते हैं; आत्मा के लिए ही प्राणी प्रिय होते हैं। प्रिय, सब कुछ के लिए सब कुछ प्रिय नहीं होता है; आत्मा के लिए ही सब कुछ प्रिय होता है। मैत्रेयी, आत्मा को देखना चाहिए, उसके विषय में सुनना चाहिए, विचार करना चाहिए और गहराई से ध्यान करना चाहिए। प्रिय, आत्मा के दर्शन, श्रवण, मनन और विशेष ज्ञान से यह सब जाना जाता है।
English meaning
He said: It is not for the sake of a husband, my dear, that a husband is dear, but for the sake of the Self that a husband is dear. It is not for the sake of a wife, my dear, that a wife is dear, but for the sake of the Self that a wife is dear. It is not for the sake of sons, my dear, that sons are dear, but for the sake of the Self that sons are dear. It is not for the sake of wealth, my dear, that wealth is dear, but for the sake of the Self that wealth is dear. It is not for the sake of the priestly order, my dear, that the priestly order is dear, but for the sake of the Self that the priestly order is dear. It is not for the sake of ruling power, my dear, that ruling power is dear, but for the sake of the Self that ruling power is dear. It is not for the sake of worlds, my dear, that worlds are dear, but for the sake of the Self that worlds are dear. It is not for the sake of gods, my dear, that gods are dear, but for the sake of the Self that gods are dear. It is not for the sake of beings, my dear, that beings are dear, but for the sake of the Self that beings are dear. It is not for the sake of everything, my dear, that everything is dear, but for the sake of the Self that everything is dear. Maitreyi, the Self is to be seen, heard about, considered and deeply contemplated. Through seeing, hearing, reflection and understanding of the Self, my dear, all this is known.
व्याख्या
पति से लेकर सभी प्राणियों और सम्पूर्ण जगत तक दस उदाहरण पूरे दिए गए हैं। आत्मनः कामाय का अर्थ यहाँ आत्मा के लिए है; इसे सीधे स्वार्थी व्यवहार की प्रशंसा नहीं बनाया गया। ब्रह्म और क्षत्र साथ आने पर पुरोहितीय तथा राजकीय शक्ति के अर्थ में पढ़े गए हैं। सुनना, विचारना और ध्यान करना आत्मदर्शन की शिक्षा के अलग पहलू हैं।
Explanation
All ten examples, from spouses to all beings and everything, are retained. “For the sake of the Self” is not reduced to a celebration of selfish conduct. Brahma, paired with kshatra, is read as priestly authority alongside ruling power. Hearing, reflection and contemplation describe distinct aspects of the inquiry into the Self.
संदर्भ
मैत्रेयी को दिए उपदेश का केन्द्र प्रिय वस्तुओं के आधार और आत्मज्ञान की खोज पर आता है।
Context
The central teaching to Maitreyi examines what grounds dearness and the search for self-knowledge.