Passage 20.12
सा होवाच ब्राह्मणा भगवन्तस्तदेव बहु मन्यध्वं यदस्मान्नमस्कारेण मुच्येध्वम् । न वै जातु युष्माकमिमं कश्चिद्ब्रह्मोद्यं जेतेति । ततो ह वाचक्नव्युपरराम ॥ १२ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सा ह उवाच—ब्राह्मणाः भगवन्तः, यत् अस्मात् नमस्कारेण मुच्येध्वम्, तत् एव बहु मन्यध्वम् । वै युष्माकम् [मध्ये] कश्चित् जातु इमम् ब्रह्मोद्यम् [प्रति] न जेता इति । ततः ह वाचक्नवी उपरराम ।
हिन्दी अर्थ
गार्गी ने कहा: आदरणीय ब्राह्मणो, आप इसी को बहुत समझें कि नमस्कार करके इनसे छुटकारा पा लें। आपमें कोई भी इन्हें ब्रह्म-विवाद में कभी नहीं जीत सकेगा। तब वाचक्नवी चुप हो गईं।
English meaning
Gargi said, “Revered Brahmins, count it a great achievement if you can get away from him by paying homage. None of you will ever defeat him in a debate on brahman.” Vachaknavi then fell silent.
व्याख्या
यह समापन उनके आरम्भिक वचन को पूरा करता है। वे याज्ञवल्क्य की सफलता की सार्वजनिक साक्षी और निर्णायक वक्ता हैं, केवल पराजित मौन पात्र नहीं।
Explanation
The conclusion fulfils her opening declaration. She publicly judges the success of the answers, rather than functioning merely as a silenced opponent.
संदर्भ
गार्गी उत्तरों का मूल्यांकन करके सभा को अपना निर्णय देती हैं।
Context
Gargi evaluates the answers and gives the assembly her judgment.