Passage 41.3
प्राणोऽपानो व्यान इत्यष्टावक्षराणि । अष्टाक्षरं ह वा एकं गायत्र्यै पदम् । एतदु हैवास्या एतत् । स यावदिदं प्राणि तावद्ध जयति योऽस्या एतदेवं पदं वेद । अथास्या एतदेव तुरीयं दर्शतं पदं परोरजा य एष तपति । यद्वै चतुर्थं तत्तुरीयम् । दर्शतं पदमिति ददृश इव ह्येषः । परोरजा इति सर्वमु ह्येवैष रज उपर्युपरि तपति । एवं हैव श्रिया यशसा तपति योऽस्या एतदेवं पदं वेद ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
प्राणः, अपानः, व्यानः इति अष्टौ अक्षराणि [सन्ति] । गायत्र्यै एकम् पदम् अष्टाक्षरम् ह वै [अस्ति] । एतत् उ ह एव अस्याः एतत् [पदम् अस्ति] । यः अस्याः एतत् पदम् एवम् वेद, सः यावत् इदम् प्राणि [अस्ति], तावत् ह जयति । अथ यः एषः परोरजाः तपति, [सः] अस्याः एतत् एव तुरीयम् दर्शतम् पदम् [अस्ति] । यत् वै चतुर्थम् [अस्ति], तत् तुरीयम् [अस्ति] । एषः हि ददृशे इव [इति] दर्शतम् पदम् इति [उच्यते] । एषः हि सर्वम् उ रजः उपरि उपरि एव तपति इति परोरजाः इति [उच्यते] । यः अस्याः एतत् पदम् एवम् वेद, [सः] एवम् ह एव श्रिया यशसा तपति ।
हिन्दी अर्थ
“प्राण, अपान, व्यान” इन शब्दों के आठ अक्षर हैं। गायत्री का एक पद भी आठ अक्षरों का है। यही उसका वह पद है। जो उसके इस पद को इस प्रकार जानता है, वह जितना भी यह प्राणयुक्त जगत् है, उतना सब जीतता है। फिर उसका यह चौथा, दर्शनीय, रजस् के ऊपर स्थित पद है: यह जो सूर्य तपता है। जो चौथा है, वही तुरीय है। उसे दर्शनीय पद कहते हैं, क्योंकि यह मानो सामने दिखाई देता है। उसे परोरजस् कहते हैं, क्योंकि यह समस्त रजस्, अर्थात् विस्तृत आकाशीय क्षेत्र, के ऊपर-ऊपर तपता है। जो उसके इस पद को इस प्रकार जानता है, वह भी इसी तरह श्री और यश से चमकता है।
English meaning
The words “prana, apana, vyana” are counted as eight syllables. One foot of Gayatri also has eight syllables. This is that foot of hers. Whoever knows this foot in this way wins the whole extent of living beings. Then there is her fourth, visible foot, beyond the expanse: this sun that shines. What is fourth is called turiya. It is called the visible foot because it appears, as it were, before sight. It is called parorajas because it shines high above the whole celestial expanse. Whoever knows this foot in this way likewise shines with splendour and renown.
व्याख्या
तुरीय का अर्थ पाठ स्वयं “चौथा” करता है; इसे बिना कारण किसी दूसरे ग्रन्थ की चैतन्य-अवस्था नहीं बनाया गया है। परोरजस् यहाँ सूर्य के ऊर्ध्वस्थ होने का नाम है, न कि अनिवार्यतः बाद की गुण-व्यवस्था का रजोगुण। प्राण, अपान और व्यान की सूची ध्यान का सम्बन्ध है, कोई श्वास-अभ्यास नहीं।
Explanation
The passage itself glosses turiya as “fourth”; it is not automatically the state of consciousness described in another text. Parorajas names the sun’s position beyond the expanse, not necessarily the rajas of a later theory of qualities. The three vital functions form a contemplative correspondence, not a breathing exercise.
संदर्भ
तीसरा पद प्राण की तीन गतियों और जीवित जगत् से जुड़ता है। इसी अनुच्छेद में सामान्य तीन पदों से आगे सूर्यरूप चौथा पद जोड़ा जाता है।
Context
The third foot is connected with three vital functions and the living world. This passage then adds a solar fourth foot beyond the usual three.