Passage 8.3
तदेष श्लोको भवति अर्वाग्बिलश्चमस ऊर्ध्वबुध्नस्तस्मिन् यशो निहितं विश्वरूपम् । तस्यासत ऋषयः सप्त तीरे वागष्टमी ब्रह्मणा संविदानेति । अर्वाग्बिलश्चमस ऊर्ध्वबुध्न इति । इदं तच्छिर एष ह्यर्वाग्बिलश्चमस ऊर्ध्वबुध्नः । तस्मिन् यशो निहितं विश्वरूपमिति । प्राणा वै यशो विश्वरूपम् । प्राणानेतदाह । तस्यासत ऋषयः सप्त तीर इति । प्राणा वा ऋषयः । प्राणानेतदाह । वागष्टमी ब्रह्मणा संविदानेति । वाग्घ्यष्टमी ब्रह्मणा संवित्ते ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तत् एषः श्लोकः भवति-अर्वाग्बिलः ऊर्ध्वबुध्नः चमसः [अस्ति]; तस्मिन् विश्वरूपम् यशः निहितम् [अस्ति] । तस्य तीरे सप्त ऋषयः आसत; वाक् अष्टमी ब्रह्मणा संविदाना [आसीत्] इति । अर्वाग्बिलः ऊर्ध्वबुध्नः चमसः इति-इदम् तत् शिरः [अस्ति]; हि एषः अर्वाग्बिलः ऊर्ध्वबुध्नः चमसः [अस्ति] । तस्मिन् विश्वरूपम् यशः निहितम् इति-प्राणाः वै विश्वरूपम् यशः [सन्ति]; एतत् प्राणान् आह । तस्य तीरे सप्त ऋषयः आसत इति-प्राणाः वा ऋषयः [सन्ति]; एतत् प्राणान् आह । वाक् अष्टमी ब्रह्मणा संविदाना इति-हि वाक् अष्टमी ब्रह्मणा संवित्ते ।
हिन्दी अर्थ
इस विषय में यह श्लोक है: नीचे मुख और ऊपर तली वाला एक चमस है; उसमें अनेक रूपों वाला यश रखा है। उसके किनारे सात ऋषि बैठे हैं और आठवीं वाणी ब्रह्म के साथ संवाद करती है। “नीचे मुख और ऊपर तली वाला चमस” यह सिर है; वही नीचे मुख और ऊपर तली वाला चमस है। “उसमें अनेक रूपों वाला यश रखा है”: प्राण ही अनेक रूपों वाला यश हैं; यह प्राणों की बात है। “उसके किनारे सात ऋषि बैठे हैं”: प्राण ही ऋषि हैं; यह प्राणों की बात है। “आठवीं वाणी ब्रह्म के साथ संवाद करती है”: वास्तव में वाणी ही आठवीं होकर ब्रह्म के साथ संवाद करती है।
English meaning
A verse says: “A cup has its opening below and its base above; within it is placed glory in many forms. Seven seers sit at its rim, and speech, the eighth, communicates with Brahman.” “The cup with its opening below and base above” refers to this head, for it is such an inverted cup. “Glory in many forms is placed within it”: the vital faculties are that many-formed glory; the words refer to them. “Seven seers sit at its rim”: the vital faculties are the seers; the words refer to them. “Speech, the eighth, communicates with Brahman”: speech indeed is the eighth and communicates with Brahman.
व्याख्या
चमस यज्ञ का पात्र है; उलटे पात्र की उपमा सिर और उसकी नीचे खुलती इन्द्रियों को समझाती है। सात ऋषि इन्द्रिय-द्वारों के रूपक हैं। वाणी का ब्रह्म से संवाद वैदिक वचन और उसके अर्थ के सम्बन्ध को भी सामने लाता है; सात और आठ की गणना को अगले अनुच्छेद के सात ऋषि-नामों में जबरन नहीं मिलाया गया।
Explanation
The chamasa is a ritual cup. Its inverted shape evokes the head and its downward-facing openings. The seven seers represent sensory faculties. Speech’s communication with Brahman also evokes sacred utterance and meaning; the seven-and-eight count is not artificially collapsed into the seven named seers of the next passage.
संदर्भ
प्राण और सिर की व्याख्या एक पहेली-जैसे श्लोक और उसके अपने गद्य-भाष्य से की जाती है।
Context
The faculties and the head are explained through a riddle-like verse followed by the text’s own prose interpretation.