Passage 8.2
तमेताः सप्ताक्षितय उपतिष्ठन्ते । तद्या इमा अक्षंल्लोहिन्यो राजयस्ताभिरेनं रुद्रोऽन्वायत्तः । अथ या अक्षन्नापस्ताभिः पर्जन्यः । या कनीनका तयादित्यः । यत्कृष्णं तेनाग्निर् । यच्छुक्लं तेनेन्द्रः । अधरयैनं वर्तन्या पृथिव्यन्वायत्ता । द्यौरुत्तरया । नास्यान्नं क्षीयते य एवं वेद ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
एताः सप्त अक्षितयः तम् उपतिष्ठन्ते । तत् याः इमाः अक्षन् लोहिन्यः राजयः [सन्ति], ताभिः रुद्रः एनम् अन्वायत्तः [अस्ति] । अथ याः अक्षन् आपः [सन्ति], ताभिः पर्जन्यः [एनम् अन्वायत्तः अस्ति] । या कनीनका [अस्ति], तया आदित्यः [एनम् अन्वायत्तः अस्ति] । यत् कृष्णम् [अस्ति], तेन अग्निः [एनम् अन्वायत्तः अस्ति] । यत् शुक्लम् [अस्ति], तेन इन्द्रः [एनम् अन्वायत्तः अस्ति] । अधरया वर्तन्या पृथिवी एनम् अन्वायत्ता [अस्ति]; उत्तरया [वर्तन्या] द्यौः [एनम् अन्वायत्ता अस्ति] । यः एवम् वेद, अस्य अन्नम् न क्षीयते ।
हिन्दी अर्थ
उस प्राण की सेवा ये सात अक्षय करने वाली शक्तियाँ करती हैं। आँख में जो लाल रेखाएँ हैं, उनके द्वारा रुद्र उससे जुड़े हैं; आँख का जो जल है, उसके द्वारा पर्जन्य; जो पुतली है, उसके द्वारा आदित्य; जो काला भाग है, उसके द्वारा अग्नि; जो श्वेत भाग है, उसके द्वारा इन्द्र। निचली पलक के द्वारा पृथिवी उससे जुड़ी है और ऊपरी पलक के द्वारा द्युलोक। जो इस प्रकार जानता है, उसका अन्न समाप्त नहीं होता।
English meaning
Seven powers that sustain its undiminishing life attend this vital breath. Through the red lines in the eye, Rudra is connected with it; through the moisture in the eye, Parjanya; through the pupil, the sun; through the dark part, fire; and through the white part, Indra. Earth is connected with it through the lower eyelid, and heaven through the upper eyelid. The food of one who knows this does not run out.
व्याख्या
काण्व पाठ के अनुसार यहाँ काले भाग से अग्नि और श्वेत भाग से इन्द्र जुड़े हैं; दूसरी शाखा में इनका क्रम उलट मिलता है। अक्षितयः को क्षय रोकने वाली पोषक शक्तियों के रूप में पढ़ा गया है। यह देवताओं और शरीर का ध्यानात्मक सम्बन्ध है, नेत्र-विज्ञान का विवरण नहीं।
Explanation
In the Kanva reading, fire corresponds to the dark part and Indra to the white part; the other recension reverses them. Akshitayah is understood as sustaining powers that prevent depletion. These are contemplative correspondences between deities and the body, not ophthalmology.
संदर्भ
शिशु-रूप प्राण को बनाए रखने वाली सात शक्तियों का आँख के अंगों से सम्बन्ध बताया जाता है।
Context
The seven sustaining powers are correlated with features of the eye.