Passage 32.2
तद्यत्तत्सत्यमसौ स आदित्यः । य एष एतस्मिन्मण्डले पुरुषो यश्चायं दक्षिणेऽक्षन् पुरुषस्तावेतावन्योऽन्यस्मिन् प्रतिष्ठितौ । रश्मिभिरेषोऽस्मिन् प्रतिष्ठितः प्राणैरयममुष्मिन् । स यदोत्क्रमिष्यन् भवति शुद्धमेवैतन्मण्डलं पश्यति । नैनमेते रश्मयः प्रत्यायन्ति ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तत् यत् तत् सत्यम् [अस्ति], सः असौ आदित्यः [अस्ति] । यः एषः एतस्मिन् मण्डले पुरुषः [अस्ति], यः च अयम् दक्षिणे अक्षन् पुरुषः [अस्ति], तौ एतौ अन्यः अन्यस्मिन् प्रतिष्ठितौ [स्तः] । एषः [आदित्यपुरुषः] रश्मिभिः अस्मिन् [चाक्षुषे पुरुषे] प्रतिष्ठितः [अस्ति]; अयम् [चाक्षुषः] प्राणैः अमुष्मिन् [आदित्ये] [प्रतिष्ठितः अस्ति] । सः यदा उत्क्रमिष्यन् भवति, [तदा सः] एतत् मण्डलम् शुद्धम् एव पश्यति; एते रश्मयः एनम् न प्रत्यायन्ति ।
हिन्दी अर्थ
वह जो सत्य है, वह यह सूर्य है। इस सूर्य-मण्डल में जो पुरुष है और यहाँ दाहिनी आँख में जो पुरुष है, वे दोनों एक-दूसरे में प्रतिष्ठित हैं। सूर्य का पुरुष किरणों के द्वारा इस आँख के पुरुष में प्रतिष्ठित है, और यह आँख का पुरुष प्राणों के द्वारा उस सूर्य के पुरुष में। जब यह मनुष्य शरीर से निकलने वाला होता है, तब वह इस मण्डल को केवल निर्मल, किरणरहित देखता है; ये किरणें उसकी ओर लौटकर नहीं आतीं।
English meaning
That truth is this sun. The person in the solar disc and the person here in the right eye are established in one another. The solar person is established in this one through rays, and this person in the eye is established in the solar person through the vital powers. When a person is about to depart from the body, the disc is seen as bare and clear; these rays no longer come back toward that person.
व्याख्या
सूर्य की किरणें और प्राण देखने वाले तथा दृश्य प्रकाश के परस्पर आश्रय का चित्र बनाते हैं। अन्त की मृत्यु-सम्बन्धी बात पाठ का प्राचीन संकेत-वर्णन है, आधुनिक रोग-पहचान या मृत्यु का विश्वसनीय परीक्षण नहीं। सूर्य को सीधे देखने की सलाह भी इससे नहीं निकलती।
Explanation
The rays and vital powers express the mutual dependence of the perceiver and visible light. The closing account of departure is an ancient sign of dying within the text, not a modern diagnostic test or reliable prediction of death. It is not advice to look directly at the sun.
संदर्भ
सत्य की उपासना अब सूर्य और दाहिनी आँख के बीच सम्बन्ध बनाती है। इसके बाद दोनों पुरुषों के समान रूप और अलग गुप्त नाम बताए जाएँगे।
Context
The contemplation of truth now links the sun with the right eye. The following two passages give the two persons matching forms but different secret names.