Passage 1.26
श्वोभावा मर्त्यस्य यदन्तकैतत् सर्वेंद्रियाणां जरयंति तेजः । अपि सर्वं जीवितमल्पमेव तवैव वाहास्तव नृत्यगीते ॥ २६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अन्तक, [त्वया उपन्यस्ताः भोगाः] श्वोभावाः [सन्ति] । मर्त्यस्य सर्वेन्द्रियाणाम् यत् एतत् तेजः, [तत् ते भोगाः] जरयन्ति । सर्वम् जीवितम् अपि अल्पम् एव [अस्ति] । तव एव वाहाः; तव नृत्यगीते [स्तः] ।
हिन्दी अर्थ
नचिकेता ने कहा: हे अन्तक, ये भोग कल रहेंगे भी या नहीं; ये मनुष्य की सभी इन्द्रियों का तेज क्षीण करते हैं। सारा जीवन भी अल्प ही है। आपके वाहन और आपके नृत्य-गीत आपके ही रहें।
English meaning
Nachiketas answers: “Ender of life, these enjoyments may not last even until tomorrow; they wear down the vigour of a mortal’s senses. Even an entire lifetime is brief. Keep your vehicles, your dance and your music.”
व्याख्या
श्वोभावाः कल के अस्तित्व की अनिश्चितता का संकेत है, ठीक चौबीस घंटे की अवधि का दावा नहीं। उसका निषेध प्रश्न के सामने इन भोगों की अपर्याप्तता का है। इसे हर प्रकार की कला या सामान्य आनन्द की निन्दा के रूप में विस्तार देना मूल प्रसंग से आगे जाएगा।
Explanation
The reference to tomorrow signals impermanence, not a precise twenty-four-hour claim. His refusal concerns these pleasures as substitutes for the inquiry. Turning it into a condemnation of every art or ordinary enjoyment would exceed the context.
संदर्भ
नचिकेता आकर्षक वस्तुओं को उनकी अस्थिरता और अन्तिम सीमा के आधार पर परखता है।
Context
Nachiketas evaluates the attractions by their instability and ultimate limits.