Passage 1.20
येयं प्रेते विचिकित्सा मनुष्येऽस्तीत्येके नायमस्तीति चैके । एतद्विद्यामनुशिष्टस्त्वयाऽहं वराणामेष वरस्तृतीयः ॥ २० ॥
पदच्छेद
अन्वय
मनुष्ये प्रेते या इयम् विचिकित्सा [अस्ति]—अस्ति इति एके [वदन्ति], अयम् न अस्ति इति च एके [वदन्ति]—त्वया अनुशिष्टः अहम् एतत् विद्याम् । वराणाम् एषः तृतीयः वरः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
मनुष्य के मर जाने पर यह सन्देह होता है: कुछ कहते हैं कि वह रहता है, और कुछ कहते हैं कि वह नहीं रहता। आपके उपदेश से मैं यह जानना चाहता हूँ। वरों में यही मेरा तीसरा वर है।
English meaning
“When a person has died, this doubt arises: some say that he still exists, while others say that he does not. Taught by you, I would know the truth of this. This is my third boon.”
व्याख्या
अस्ति और नास्ति दोनों मतों को पहले निष्पक्ष रूप से रखा गया है। प्रश्न केवल स्वर्ग का सुख नहीं, मृत्यु के पार आत्मा के स्वरूप का है। उत्तर अभी नहीं दिया गया; यह संवाद की खोज का आरम्भ है।
Explanation
The opposing positions are first stated without resolving them. The question is no longer simply about heavenly happiness, but about the Self in relation to death. The verse asks the question; it does not yet supply its answer.
संदर्भ
नचिकेता अब मृत्यु के बाद व्यक्ति के अस्तित्व का विवाद सामने रखता है।
Context
Nachiketas raises the disputed question of a person’s existence after death.