Passage 2.3
स त्वं प्रियान्प्रियरूपांश्च कामान् अभिध्यायन्नचिकेतोऽत्यस्राक्षीः । नैतां सृङ्कां वित्तमयीमवाप्तो यस्यां मज्जन्ति बहवो मनुष्याः ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
नचिकेतः, सः त्वम् प्रियान् प्रियरूपान् च कामान् अभिध्यायन् अत्यस्राक्षीः । यस्याम् बहवः मनुष्याः मज्जन्ति, एताम् वित्तमयीम् सृङ्काम् न अवाप्तः [असि] ।
हिन्दी अर्थ
हे नचिकेता, तुमने प्रिय और आकर्षक इच्छित वस्तुओं को सोच-समझकर छोड़ दिया। तुम उस धनमयी शृंखला में नहीं पड़े जिसमें बहुत से मनुष्य डूब जाते हैं।
English meaning
Nachiketas, after considering desirable and attractive pleasures, you let them go. You did not enter the wealth-made chain in which many people sink.
व्याख्या
सृङ्का पहले पुरस्कार के रूप में आई थी, यहाँ बन्धन का रूपक बनती है। धन को स्वतः दुष्ट नहीं कहा गया; उसकी मोहक शक्ति में डूबकर अपने प्रश्न से हट जाना मुख्य विषय है।
Explanation
Srnka appeared earlier as a reward and now functions as a binding image. Wealth is not declared intrinsically evil; the issue is losing one’s inquiry within its attractions.
संदर्भ
यम श्रेय के चुनाव को नचिकेता के उत्तर में पहचानते हैं।
Context
Yama recognizes Nachiketas’s response as an instance of choosing the beneficial.