Passage 2.15
सर्वे वेदा यत्पदमामनन्ति तपाँसि सर्वाणि च यद्वदन्ति । यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदँ संग्रहेण ब्रवीम्योमित्येतत् ॥ १५ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सर्वे वेदाः यत् पदम् आमनन्ति, सर्वाणि तपांसि च यत् वदन्ति, यत् इच्छन्तः ब्रह्मचर्यम् चरन्ति, तत् पदम् ते संग्रहेण ब्रवीमि; ओम् इति एतत् [पदम् अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जिस पद का सभी वेद प्रतिपादन करते हैं, जिसकी ओर सभी तप संकेत करते हैं और जिसकी चाह में लोग ब्रह्मचर्य का जीवन बिताते हैं, वह पद मैं तुम्हें संक्षेप में बताता हूँ: वह ॐ है।
English meaning
The goal proclaimed by all the Vedas, indicated by all disciplines of austerity, and sought through a life of brahmacharya, I tell you briefly: it is Om.
व्याख्या
पदम् लक्ष्य और स्थिति दोनों का संकेत है। ब्रह्मचर्य में विद्यार्थी का अनुशासित जीवन तथा संयम शामिल हैं; ॐ को लक्ष्य का नाम और ध्यान का प्रतीक मानना आगे के आलम्बन-वर्णन से जुड़ता है।
Explanation
Pada suggests both goal and state. Brahmacharya includes disciplined studentship and restraint, while Om serves as name and contemplative symbol of the goal, preparing the following account of support.
संदर्भ
यम उत्तर को ॐ के संक्षिप्त प्रतीक में रखते हैं।
Context
Yama presents the answer through the concise symbol Om.