Passage 4.9
छन्दांसि यज्ञाः क्रतवो व्रतानि भूतं भव्यं यच्च वेदा वदन्ति । अस्मान्मायी सृजते विश्वमेतत्तस्मिंश्चान्यो मायया सन्निरुद्धः ॥ ९ ॥
पदच्छेद
अन्वय
छन्दांसि यज्ञाः क्रतवः व्रतानि भूतम् भव्यम् यत् च वेदाः वदन्ति, एतत् विश्वम् अस्मात् मायी सृजते । तस्मिन् च अन्यः मायया सन्निरुद्धः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
छन्द, यज्ञ, क्रतु, व्रत, भूत और भविष्य तथा वेद जो कहते हैं, यह समस्त विश्व मायी इसी आधार से रचता है। उसी में दूसरा जीव माया से बँधा हुआ रहता है।
English meaning
Meters, sacrifices, rites, vows, past and future, and what the Vedas declare: the possessor of māyā brings forth this whole universe from that ground. Within it, the other self remains confined by māyā.
व्याख्या
मायी शक्ति का धारक है, जबकि अन्यः उसी क्षेत्र में बँधा अनुभवकर्ता। माया का अर्थ यहाँ केवल झूठ नहीं; रचना की सामर्थ्य और बन्धन का माध्यम दोनों सन्दर्भ साथ आते हैं।
Explanation
The possessor of māyā wields the power; the “other” is the experiencer constrained within its field. Māyā here is not merely a synonym for falsehood: creative power and the medium of limitation are both in view.
संदर्भ
वैदिक विधि और काल सहित समूचा जगत् माया के प्रसंग में रखा जाता है।
Context
The ritual order and time are included within the world produced through māyā.