Passage 4.3
त्वं स्त्री पुमानसि त्वं कुमार उत वा कुमारी । त्वं जीर्णो दण्डेन वञ्चसि त्वं जातो भवसि विश्वतोमुखः ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
त्वम् स्त्री [असि]; [त्वम्] पुमान् असि; त्वम् कुमारः [असि], उत वा कुमारी [असि] । त्वम् जीर्णः दण्डेन वञ्चसि; त्वम् विश्वतोमुखः जातः भवसि ।
हिन्दी अर्थ
तुम स्त्री हो और पुरुष भी; तुम बालक हो अथवा बालिका। तुम वृद्ध होकर छड़ी के सहारे चलते हो; जन्म लेकर सभी दिशाओं में मुख वाले बनते हो।
English meaning
You are woman and man; you are boy and girl. Grown old, you move with a staff; being born, you appear with faces in every direction.
व्याख्या
लिंग और आयु की भिन्न अवस्थाएँ एक ही व्यापक सत्ता के रूप कहे गए हैं। वृद्ध का दण्ड विशिष्ट मानवीय निर्बलता को भी इस दृष्टि में स्थान देता है, केवल शक्ति और यौवन को नहीं।
Explanation
Different genders and ages are presented as forms of one pervasive reality. The elder’s staff includes human vulnerability within that vision, not only strength and youth.
संदर्भ
ब्रह्माण्डीय तत्त्वों से एकता का दर्शन दैनिक मानव जीवन में उतरता है।
Context
The vision of unity moves from cosmic elements into everyday human life.