Passage 4.11
यो योनिं योनिमधितिष्ठत्येको यस्मिन्निदं सं च विचैति सर्वम् । तमीशानं वरदं देवमीड्यं निचाय्येमां शान्तिमत्यन्तमेति ॥ ११ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यः एकः योनिम् योनिम् अधितिष्ठति, यस्मिन् इदम् सर्वम् सम् च वि एति, तम् ईशानम् वरदम् ईड्यम् देवम् निचाय्य [ज्ञाता] इमाम् शान्तिम् अत्यन्तम् एति ।
हिन्दी अर्थ
जो एक प्रत्येक योनि पर अधिष्ठित है, जिसमें यह सब जुड़ता और अलग होता है, उस वर देने वाले, स्तुत्य देव ईश्वर को पहचानकर पूर्ण शान्ति प्राप्त होती है।
English meaning
Recognizing the one who presides over every source of birth, in whom all this joins together and disperses, the Lord who grants gifts and deserves praise, one reaches complete peace.
व्याख्या
योनि-योनि की पुनरावृत्ति किसी एक उत्पत्ति-स्थान को विशेषाधिकार नहीं देती। शान्ति का आधार विविध कारणों के पीछे एक नियामक को पहचानना है।
Explanation
The repeated “every source” does not privilege a single birthplace. Peace is connected with recognizing one presiding reality behind the plurality of origins.
संदर्भ
प्रकृति और उसके अधिष्ठाता का सम्बन्ध जन्म तथा लय के सभी केन्द्रों तक फैलाया जाता है।
Context
The relation of nature and its ruler is extended to every center of arising and dissolution.