Passage 3.21
वेदाहमेतमजरं पुराणं सर्वात्मानं सर्वगतं विभुत्वात् । जन्मनिरोधं प्रवदन्ति यस्य ब्रह्मवादिनो हि प्रवदन्ति नित्यम् ॥ २१ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अहम् एतम् अजरम् पुराणम् विभुत्वात् सर्वगतम् सर्वात्मानम् वेद । यस्य जन्मनिरोधम् ब्रह्मवादिनः प्रवदन्ति, [तम्] हि नित्यम् प्रवदन्ति ।
हिन्दी अर्थ
मैं इस अजर, पुरातन, सबका आत्मा और व्यापकता से सर्वगत पुरुष को जानता हूँ। ब्रह्मवादी उसके सम्बन्ध में जन्म के निरोध की बात कहते हैं और उसे नित्य बताते हैं।
English meaning
I know this ageless, ancient one, the Self of all, present everywhere through his pervasiveness. Those who speak of Brahman declare the ending of birth in relation to him and proclaim him eternal.
व्याख्या
जन्मनिरोधम् को साधक के पुनर्जन्म की निवृत्ति या परम सत्ता की अजन्मता के सन्दर्भ में पढ़ा जा सकता है। उत्तरार्ध की संक्षिप्त रचना के कारण दोनों अर्थों का सम्बन्ध खुला रखा गया है।
Explanation
The ending of birth may refer to release from rebirth or to the unborn character of ultimate reality. The compressed syntax of the second half leaves their relationship open.
संदर्भ
अध्याय पहले की वेदाहम् घोषणा को अजरता, सर्वात्मभाव और जन्म-मुक्ति के साथ दोहराकर समाप्त होता है।
Context
The chapter closes by renewing the “I know” declaration with agelessness, universal selfhood and freedom from birth.