Passage 1.6
अथादित्य उदयन्यत्प्राचीं दिशं प्रविशति तेन प्राच्यान् प्राणान् रश्मिषु सन्निधत्ते । यद्दक्षिणां यत् प्रतीचीं यदुदीचीं यदधो यदूर्ध्वं यदन्तरा दिशो यत् सर्वं प्रकाशयति तेन सर्वान् प्राणान् रश्मिषु सन्निधत्ते ॥ ६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ उदयन् आदित्यः यत् प्राचीम् दिशम् प्रविशति, तेन प्राच्यान् प्राणान् रश्मिषु सन्निधत्ते । यत् दक्षिणाम् [दिशम् प्रकाशयति], यत् प्रतीचीम् [दिशम्], यत् उदीचीम् [दिशम्], यत् अधः, यत् ऊर्ध्वम्, यत् अन्तरा दिशः, यत् सर्वम् प्रकाशयति, तेन सर्वान् प्राणान् रश्मिषु सन्निधत्ते ।
हिन्दी अर्थ
उगता हुआ सूर्य जब पूर्व दिशा में प्रवेश करता है, तब वह पूर्व के प्राणों को अपनी किरणों में समेट लेता है। जब वह दक्षिण, पश्चिम, उत्तर, नीचे, ऊपर और बीच की दिशाओं को प्रकाशित करता है, और जब वह सब कुछ प्रकाशित करता है, तब वह सभी प्राणों को अपनी किरणों में समेट लेता है।
English meaning
When the rising sun enters the eastern direction, it gathers the lives in the east into its rays. As it illuminates the south, west, north, below, above, and the intervening directions, indeed everything, it gathers all living powers into its rays.
व्याख्या
किरणों में प्राणों का समेटा जाना उपासना की भाषा है: प्रकाश में आने वाली विविध जीव-सत्ताएँ एक व्यापक जीवन-सिद्धान्त से जुड़ती हैं। दिशाओं की पूरी सूची इस सम्बन्ध को किसी एक प्रदेश तक सीमित नहीं रहने देती। यह किरणों में व्यक्तियों के भौतिक संग्रह का दावा नहीं है।
Explanation
The gathering of lives into rays belongs to contemplative imagery: the many living beings brought into the light are related to one encompassing life-principle. The exhaustive list of directions makes that relationship universal rather than local. It is not a claim that persons are physically stored in sunlight.
संदर्भ
सूर्य को प्राण कहने का अर्थ प्रकाश के सर्वदिशा-व्यापी प्रसार से खुलता है।
Context
The identification of the sun with prana is unfolded through its illumination of every direction.