Passage 4.1
अथ हैनं सौर्यायणी गार्ग्यः पप्रच्छ । भगवन्नेतस्मिन् पुरुषे कानि स्वपन्ति कान्यस्मिञ्जाग्रति कतर एष देवः स्वप्नान् पश्यति कस्यैतत् सुखं भवति कस्मिन्नु सर्वे सम्प्रतिष्ठिता भवन्तीति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ ह सौर्यायणी गार्ग्यः एनम् पप्रच्छ-भगवन्, एतस्मिन् पुरुषे कानि स्वपन्ति? अस्मिन् कानि जाग्रति? कतरः एषः देवः स्वप्नान् पश्यति? एतत् सुखम् कस्य भवति? सर्वे कस्मिन् नु सम्प्रतिष्ठिताः भवन्ति इति ।
हिन्दी अर्थ
तब सौर्यायणी गार्ग्य ने उनसे पूछा: भगवन्, इस व्यक्ति में कौन-से अंग या सामर्थ्य सोते हैं और कौन जागते रहते हैं? कौन-सा देव स्वप्न देखता है? यह सुख किसका होता है? और किसमें ये सब पूर्णतः स्थित हो जाते हैं?
English meaning
Then Sauryayani Gargya asked him: Venerable sir, which faculties in this person sleep, and which remain awake? Which deity sees dreams? To whom does this happiness belong? And in what do all these finally find their resting place?
व्याख्या
सवाल केवल नींद का कारण नहीं पूछता; वह निष्क्रिय इन्द्रियों, चलती जीवन-क्रियाओं, स्वप्नकर्ता और सुख के भोक्ता में भेद करता है। अंतिम प्रश्न इन सब विविध कार्यों का साझा आश्रय खोजता है।
Explanation
The question does not merely ask why sleep occurs. It distinguishes inactive senses, continuing vital activity, the dreamer, and the experiencer of happiness, then asks for the common support of all these functions.
संदर्भ
चौथा प्रश्न जागरण, स्वप्न और गहरी नींद के माध्यम से चेतना के आधार की खोज करता है।
Context
The fourth question investigates the basis of awareness through waking, dream, and deep sleep.