Passage 6.8
अव्यक्तात्तु परः पुरुषो व्यापकोऽलिङ्ग एव च । यं ज्ञात्वा मुच्यते जन्तुरमृतत्वं च गच्छति ॥ ८ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अव्यक्तात् तु परः पुरुषः व्यापकः अलिङ्गः एव च [अस्ति] । यम् ज्ञात्वा जन्तुः मुच्यते, अमृतत्वम् च गच्छति ।
हिन्दी अर्थ
अव्यक्त से भी परे सर्वव्यापक और किसी पहचान-चिह्न से रहित पुरुष है। उसे जानकर जीव मुक्त होता है और अमृतत्व प्राप्त करता है।
English meaning
Beyond the unmanifest is the all-pervading person, without a distinguishing mark. Knowing that one, the living being is freed and reaches immortality.
व्याख्या
अलिङ्ग का आशय सामान्य वस्तुओं की तरह पहचानने वाले लक्षण का अभाव है। पुरुष यहाँ मानव पुरुष-देह नहीं, सर्वव्यापक आत्मतत्त्व है; लिंग-आधारित जैविक अर्थ इस प्रसंग में उपयुक्त नहीं।
Explanation
Alinga denies an identifying mark of the kind ordinary objects possess. Purusha here denotes the pervasive self-principle, not a male human body or a biological classification.
संदर्भ
भीतर की श्रेणी अपने अंतिम बिन्दु पुरुष पर पहुँचती है।
Context
The inward sequence reaches its endpoint in the person.