Passage 6.2
यदिदं किं च जगत् सर्वं प्राण एजति निःसृतम् । महद्भयं वज्रमुद्यतं य एतद्विदुरमृतास्ते भवन्ति ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यत् इदम् किञ्च सर्वम् जगत् [अस्ति], निःसृतम् [तत्] प्राण एजति । [तत्] महत् भयम् उद्यतम् वज्रम् [अस्ति] । ये एतत् विदुः, ते अमृताः भवन्ति ।
हिन्दी अर्थ
यह जो भी सम्पूर्ण जगत है, प्राण से निकला हुआ उसी में कम्पित और गतिशील है। वह उठे हुए वज्र के समान महान् भयप्रद शक्ति है; जो इसे जानते हैं वे अमृत होते हैं।
English meaning
Whatever this whole world is, it issues from and moves in the life-principle. That is a mighty source of awe, like an uplifted thunderbolt; those who know it become immortal.
व्याख्या
प्राणे का अर्थ यहाँ केवल फेफड़ों की हवा नहीं, व्यापक जीवनाधार है। वज्र और भय की छवि प्राचीन सत्ता-रूपक है, जिससे विश्वव्यवस्था की अवहेलना-असम्भवता व्यक्त होती है।
Explanation
Prana here is not merely air in the lungs but the pervasive ground of life. Thunderbolt and awe use an ancient image of sovereign power to express the inescapability of cosmic order.
संदर्भ
विश्ववृक्ष का आधार अब गति और नियमन की शक्ति के रूप में वर्णित है।
Context
The tree’s ground is described as the source of movement and cosmic rule.