Passage 5.9
अग्निर्यथैको भुवनं प्रविष्टो रूपं रूपं प्रतिरूपो बभूव । एकस्तथा सर्वभूतान्तरात्मा रूपं रूपं प्रतिरूपो बहिश्च ॥ ९ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यथा एकः अग्निः भुवनम् प्रविष्टः रूपम् रूपम् प्रतिरूपः बभूव, तथा एकः सर्वभूतान्तरात्मा रूपम् रूपम् प्रतिरूपः [भवति], बहिः च [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जैसे एक अग्नि जगत में प्रवेश करके प्रत्येक रूप के अनुसार अलग रूप वाली होती है, वैसे ही सभी भूतों की एक अन्तरात्मा प्रत्येक रूप के अनुरूप दिखाई देती है और उनके बाहर भी है।
English meaning
As one fire, entering the world, assumes a form corresponding to each thing, so the one inner self of all beings appears according to each form and is also beyond them.
व्याख्या
ईंधन के बदलने से लौ का आकार बदलता है, पर अग्नि की सामान्य प्रकृति नहीं। बहिश्च जोड़कर पाठ चेतावनी देता है कि आत्मा को देहों में बाँटी हुई वस्तु न समझा जाए।
Explanation
Different fuels give fire different shapes without changing its common nature. “Also beyond” prevents the image from reducing the self to a substance partitioned among bodies.
संदर्भ
अग्नि की उपमा एक आत्मा और अनेक देहों का सम्बन्ध बताती है।
Context
Fire illustrates the relation of one self to many bodily forms.