Passage 5.2
हँसः शुचिषद्वसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिर्दुरोणसत् । नृषद्वरसदृतसद्व्योमसद् अब्जा गोजा ऋतजा अद्रिजा ऋतं बृहत् ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[सः आत्मा] हंसः शुचिषत्, वसुः अन्तरिक्षसत्, होता वेदिषत्, अतिथिः दुरोणसत्, नृषत् वरसत् ऋतसत् व्योमसत्, अब्जाः गोजाः ऋतजाः अद्रिजाः [अस्ति]; ऋतम् [अवितथस्वभावः इत्यर्थः] बृहत् [महान् इत्यर्थः] [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
वह शुद्ध आकाश में स्थित हंस है, अन्तरिक्ष में रहने वाला वसु; वेदी पर होता और घर में अतिथि है। वह मनुष्यों, श्रेष्ठ देवों, ऋत और आकाश में स्थित है; जल, पृथ्वी, ऋत और पर्वत से जन्म लेने वाला महान् ऋत है।
English meaning
It is the hamsa dwelling in brightness, the Vasu in the midspace, the priest at the altar and the guest in the house. It dwells among humans, among the exalted, in sacred order and in the sky; born in water, earth, order and mountains, it is the vast reality of rita.
व्याख्या
यह पुरानी ऋग्वैदिक हंसवती ऋचा की भाषा है, जिसे आत्मा की सर्वव्यापकता में रखा गया है। ऋत सत्य, विश्व-व्यवस्था और यज्ञगत व्यवस्था के अर्थों को जोड़ता है; एक अंग्रेज़ी शब्द उसके सभी संकेत नहीं पकड़ता।
Explanation
The verse reuses the older Rigvedic Hamsavati hymn within an account of the all-pervading self. Rita links truth, cosmic order and ritual order, so no single English equivalent exhausts its range.
संदर्भ
नगर का निवासी अब व्यापक वैदिक विश्वचित्र में पहचाना जाता है।
Context
The indwelling presence is recognized throughout a Vedic cosmic landscape.