Passage 5.15
न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः । तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति ॥ १५ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तत्र सूर्यः न भाति, चन्द्रतारकम् न [भाति], इमाः विद्युतः न भान्ति; अयम् अग्निः कुतः [भाति]? भान्तम् तम् एव सर्वम् अनुभाति; तस्य भासा इदम् सर्वम् विभाति ।
हिन्दी अर्थ
वहाँ सूर्य प्रकाश नहीं करता, न चन्द्रमा और तारे; ये विद्युतें भी नहीं चमकतीं, फिर इस अग्नि की क्या बात! उसी के चमकने पर सब चमकते हैं; उसी के प्रकाश से यह सब प्रकाशित है।
English meaning
There the sun does not shine, nor moon and stars; these flashes of lightning do not shine, much less this fire. Everything shines after that shining one; by its light all this is illumined.
व्याख्या
ब्रह्म को किसी दीपक या सूर्य की सहायता से दृश्य वस्तु नहीं बनाया जा सकता। प्रकाश की भाषा यहाँ सभी अनुभवों के प्रकट होने की शर्त बताती है; यह सूर्य के भौतिक प्रकाश को नकारती नहीं।
Explanation
Brahman is not an object made visible by a lamp or sun. Light describes that by which experience becomes manifest, not a denial of physical sunlight.
संदर्भ
वल्ली का अन्त सभी प्रकाशों के आधार की पहचान से होता है।
Context
The valli ends by identifying the ground of every illumination.