Passage 4.7
या प्राणेन संभवत्यदितिर्देवतामयी । गुहां प्रविश्य तिष्ठन्तीं या भूतेभिर्व्यजायत । एतद्वै तत् ॥ ७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
या देवतामयी अदितिः प्राणेन सम्भवति, या भूतेभिः [समन्विता] व्यजायत, गुहाम् प्रविश्य तिष्ठन्तीम् [ताम् अदितिम् यः व्यपश्यत्, सः एतत् पश्यति] । एतत् वै तत् [ब्रह्म अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
जो देवताओं से बनी अदिति प्राण के साथ प्रकट होती है, जो भूतों के साथ जन्मी और गुहा में प्रवेश करके स्थित है, वह भी वही तत्त्व है। यही वास्तव में वह है।
English meaning
Aditi, comprising the divine powers, arises together with life-breath; born with the beings, she enters the cave and abides there. This indeed is that.
व्याख्या
अदिति यहाँ देवताओं की समष्टि और जीवन के व्यापक रूप से जुड़ी है। उसे केवल किसी आधुनिक ऊर्जा की संज्ञा बना देना ऐतिहासिक देवतामयी कल्पना मिटा देगा; पाठ उसे भी उसी अन्तर्निहित सत्य में समेटता है।
Explanation
Aditi is associated with the collectivity of divine powers and pervasive life. Reducing her to a modern term for energy would erase the historical divine imagery, which the verse includes within the same underlying reality.
संदर्भ
प्रथमज के बाद अदिति का स्त्रीलिंग विश्वरूप प्रस्तुत होता है।
Context
After the first-born, Aditi appears as a feminine cosmic figure.