Passage 4.8
पृथिवी च पृथिवीमात्रा चापश्चापोमात्रा च तेजश्च तेजोमात्रा च वायुश्च वायुमात्रा चाकाशश्चाकाशमात्रा च चक्षुश्च द्रष्टव्यं च श्रोत्रं च श्रोतव्यं च घ्राणं च घ्रातव्यं च रसश्च रसयितव्यं च त्वक्च स्पर्शयितव्यं च वाक्च वक्तव्यं च हस्तौ चादातव्यं चोपस्थश्चानन्दयितव्यं च पायुश्च विसर्जयितव्यं च पादौ च गन्तव्यं च मनश्च मन्तव्यं च बुद्धिश्च बोद्धव्यं चाहङ्कारश्चाहङ्कर्तव्यं च चित्तं च चेतयितव्यं च तेजश्च विद्योतयितव्यं च प्राणश्च विधारयितव्यं च ॥ ८ ॥
पदच्छेद
अन्वय
पृथिवी च पृथिवीमात्रा च, आपः च आपोमात्रा च, तेजः च तेजोमात्रा च, वायुः च वायुमात्रा च, आकाशः च आकाशमात्रा च, चक्षुः च द्रष्टव्यम् च, श्रोत्रम् च श्रोतव्यम् च, घ्राणम् च घ्रातव्यम् च, रसः च रसयितव्यम् च, त्वक् च स्पर्शयितव्यम् च, वाक् च वक्तव्यम् च, हस्तौ च आदातव्यम् च, उपस्थः च आनन्दयितव्यम् च, पायुः च विसर्जयितव्यम् च, पादौ च गन्तव्यम् च, मनः च मन्तव्यम् च, बुद्धिः च बोद्धव्यम् च, अहङ्कारः च अहङ्कर्तव्यम् च, चित्तम् च चेतयितव्यम् च, तेजः च विद्योतयितव्यम् च, प्राणः च विधारयितव्यम् च [पर आत्मनि सम्प्रतिष्ठन्ते] ।
हिन्दी अर्थ
पृथिवी और उसका सूक्ष्म तत्त्व; जल और उसका सूक्ष्म तत्त्व; तेज और उसका सूक्ष्म तत्त्व; वायु और उसका सूक्ष्म तत्त्व; आकाश और उसका सूक्ष्म तत्त्व; आँख और देखने योग्य; कान और सुनने योग्य; घ्राण और सूँघने योग्य; रसनेन्द्रिय और चखने योग्य; त्वचा और छूने योग्य; वाणी और बोलने योग्य; दोनों हाथ और लेने योग्य; जननेन्द्रिय और आनंद लेने योग्य; गुदा और त्यागने योग्य; दोनों पाँव और जाने योग्य; मन और सोचने योग्य; बुद्धि और जानने योग्य; अहंकार और मैं-भाव का विषय; चित्त और चेतन-विचार का विषय; तेज और प्रकाशित करने योग्य; प्राण और धारण करने योग्य, ये सब उसी में विश्राम पाते हैं।
English meaning
Earth and its subtle element; water and its subtle element; fire and its subtle element; air and its subtle element; space and its subtle element; the eye and what can be seen; hearing and what can be heard; smell and what can be smelled; taste and what can be tasted; skin and what can be touched; speech and what can be spoken; the hands and what can be taken; the generative organ and what can be enjoyed; the anus and what can be discharged; the feet and where one can go; mind and what can be thought; understanding and what can be understood; the I-making faculty and what can be identified as I; the reflective mind and its objects; radiance and what it illuminates; vital power and what it sustains: all these rest in that Self.
व्याख्या
सूची केवल इन्द्रियाँ नहीं गिनती; हर शक्ति के साथ उसका विषय भी रखती है। स्थूल-सूक्ष्म तत्त्व, ज्ञान-कर्म इन्द्रियाँ और मन के अलग कार्य एक साथ शामिल होने से अनुभव का पूरा विषय-विषयी ढाँचा आश्रित दिखाया जाता है। सूची को छोटी काल्पनिक कविताओं में नहीं बाँटा गया है।
Explanation
The list pairs each capacity with its object rather than merely naming organs. Gross and subtle elements, perception and action, and distinct mental activities are brought together so that the whole subject–object structure of experience appears dependent. The long prose inventory is kept intact.
संदर्भ
पिछले मंत्र के यह सब का विस्तृत अर्थ एक अविच्छिन्न सूची में दिया जाता है।
Context
An uninterrupted inventory spells out what the preceding passage means by all this.