Passage 1.11
सुषुप्तस्थानः प्राज्ञो मकारस्तृतीया मात्रा मितेरपीतेर्वा मिनोति ह वा इदं सर्वमपीतिश्च भवति य एवं वेद ॥ ११ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सुषुप्तस्थानः प्राज्ञः मितेः अपीतेः वा मकारः तृतीया मात्रा [अस्ति] । यः एवम् वेद, [सः] ह वै इदम् सर्वम् मिनोति, अपीतिः च भवति ।
हिन्दी अर्थ
सुषुप्ति का प्राज्ञ मकार है, तीसरी मात्रा; इसका सम्बन्ध मापन अथवा लय से है। जो ऐसा जानता है, वह इस सबको मापता या जानता है और उसके लय का स्थान होता है।
English meaning
Prajna, situated in deep sleep, is M, the third measure, through measuring or dissolution. One who knows this measures or comprehends all this and becomes its place of dissolution.
व्याख्या
मापन और लय, दोनों अर्थ मकार की व्याख्या में आते हैं। संक्षिप्त अनुवाद इन शब्द-सम्बन्धों को संकेतित करता है; किसी एक भाष्य की सम्पूर्ण व्याख्या होने का दावा नहीं करता।
Explanation
Measuring and dissolution both contribute to the account of M. The concise rendering preserves these associations without pretending to reproduce any commentary in full.
संदर्भ
माण्डूक्य उपनिषद् में आत्मा के चार पादों और ॐ की मात्राओं का विवेचन।
Context
The Mandukya teaching relates the four quarters of the Self to the measures of Om.