Passage 5.3
एष ब्रह्मैष इन्द्र एष प्रजापतिरेते सर्वे देवा इमानि च पञ्चमहाभूतानि पृथिवी वायुराकाश आपो ज्योतींषीत्येतानीमानि च क्षुद्रमिश्राणीव । बीजानीतराणि चेतराणि चाण्डजानि च जारुजानि च स्वेदजानि चोद्भिज्जानि चाश्वा गावः पुरुषा हस्तिनो यत्किञ्चेदं प्राणि जङ्गमं च पतत्रि च यच्च स्थावरं सर्वं तत्प्रज्ञानेत्रं प्रज्ञाने प्रतिष्ठितं प्रज्ञानेत्रो लोकः प्रज्ञा प्रतिष्ठा प्रज्ञानं ब्रह्म ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
एषः ब्रह्मा [अस्ति]; एषः इन्द्रः [अस्ति]; एषः प्रजापतिः [अस्ति]; एते सर्वे देवाः [सन्ति] । इमानि च पञ्चमहाभूतानि—पृथिवी वायुः आकाशः आपः ज्योतींषि इति—एतानि; इमानि च क्षुद्रमिश्राणि इव बीजानि, इतराणि च इतराणि च, अण्डजानि च जारुजानि च स्वेदजानि च उद्भिज्जानि च, अश्वाः गावः पुरुषाः हस्तिनः; यत् किञ्च इदम् प्राणि जङ्गमम् च पतत्रि च, यत् च स्थावरम्, तत् सर्वम् प्रज्ञानेत्रम् प्रज्ञाने प्रतिष्ठितम् [अस्ति] । लोकः प्रज्ञानेत्रः [अस्ति]; प्रज्ञा प्रतिष्ठा [अस्ति]; प्रज्ञानम् ब्रह्म [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
यही ब्रह्मा, यही इन्द्र और यही प्रजापति है; यही सभी देवता हैं। पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और तेज, ये पाँच महाभूत; विविध छोटे-मिले-जुले बीज; अण्डे से, गर्भ से, नमी से और धरती फोड़कर उत्पन्न कहे गए जीव; घोड़े, गायें, मनुष्य, हाथी; जो भी जीव चलता है, उड़ता है या स्थिर रहता है: यह सब प्रज्ञा द्वारा निर्देशित और प्रज्ञान में प्रतिष्ठित है। लोक प्रज्ञा से संचालित है; प्रज्ञा उसका आधार है। प्रज्ञान ब्रह्म है।
English meaning
This is Brahma, Indra and Prajapati, and all the gods. The five great elements, earth, wind, space, waters and light; the various small, mixed seeds; beings described as born from eggs, wombs, moisture or sprouts; horses, cattle, humans and elephants; whatever lives, moves, flies or stays rooted: all this is led by awareness and established in awareness. Awareness leads the world; awareness is its foundation. Prajnana is Brahman.
व्याख्या
प्रज्ञानेत्रम् में नेत्र को मार्गदर्शक या नेतृत्वकारी अर्थ में लिया गया है, केवल शारीरिक आँख नहीं। पाठ विविधता को मिटाकर सूची छोड़ नहीं देता, बल्कि हर नामित सत्ता को प्रज्ञान में प्रतिष्ठित कहता है। स्वेदज आदि जन्म-श्रेणियाँ ऐतिहासिक वर्गीकरण हैं; वे आधुनिक जीव-विज्ञान का समर्थन नहीं। आरम्भ का ब्रह्मा देवता है, जबकि अन्त का ब्रह्म दार्शनिक ब्रह्मन् है।
Explanation
In prajnanetram, netra is understood as guidance or leadership, not merely a physical eye. The passage retains a detailed diversity while declaring every named domain grounded in awareness. Birth from moisture and the other categories belong to historical classification, not modern biology. The opening Brahma names the deity; the closing brahma expresses Brahman as the philosophical ultimate.
संदर्भ
मानसिक क्रियाओं से तर्क अब देवताओं, तत्त्वों और समस्त जीव-जगत तक फैलता है। प्रज्ञानं ब्रह्म इस सूची का निष्कर्ष है, अलग से जोड़ा गया नारा नहीं।
Context
The argument expands from mental activities to gods, elements and the whole living world. Prajnanam brahma is the conclusion of that range, not an isolated slogan added to it.