Passage 1.4
तमभ्यतपत्तस्याभितप्तस्य मुखं निरभिद्यत यथाऽण्डं मुखाद्वाग्वाचोऽग्निर्नासिके निरभिद्येतां नासिकाभ्यां प्राणः । प्राणाद्वायुरक्षिणी निरभिद्येतामक्षिभ्यां चक्षुश्चक्षुष आदित्यः कर्णौ निरभिद्येतां कर्णाभ्यां श्रोत्रं श्रोत्राद्दिशस्त्वङ्निरभिद्यत त्वचो लोमानि लोमभ्य ओषधिवनस्पतयो हृदयं निरभिद्यत हृदयान्मनो मनसश्चन्द्रमा नाभिर्निरभिद्यत नाभ्या अपानोऽपानान्मृत्युः शिश्नं निरभिद्यत शिश्नाद्रेतो रेतस आपः ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[सः] तम् [पुरुषम्] अभ्यतपत् । तस्य अभितप्तस्य मुखम् यथा अण्डम् निरभिद्यत । मुखात् वाक् [अजायत]; वाचः अग्निः [अजायत] । नासिके निरभिद्येताम्; नासिकाभ्याम् प्राणः [अजायत]; प्राणात् वायुः [अजायत] । अक्षिणी निरभिद्येताम्; अक्षिभ्याम् चक्षुः [अजायत]; चक्षुषः आदित्यः [अजायत] । कर्णौ निरभिद्येताम्; कर्णाभ्याम् श्रोत्रम् [अजायत]; श्रोत्रात् दिशः [अजायन्त] । त्वक् निरभिद्यत; त्वचः लोमानि [अजायन्त]; लोमभ्यः ओषधिवनस्पतयः [अजायन्त] । हृदयम् निरभिद्यत; हृदयात् मनः [अजायत]; मनसः चन्द्रमाः [अजायत] । नाभिः निरभिद्यत; नाभ्याः अपानः [अजायत]; अपानात् मृत्युः [अजायत] । शिश्नम् निरभिद्यत; शिश्नात् रेतः [अजायत]; रेतसः आपः [अजायन्त] ।
हिन्दी अर्थ
उसने उस पुरुष को तपाया। तपने पर अण्डे के समान उसका मुख खुला; मुख से वाणी और वाणी से अग्नि प्रकट हुए। नासिकाएँ खुलीं; उनसे प्राण और प्राण से वायु। आँखें खुलीं; उनसे दृष्टि और दृष्टि से सूर्य। कान खुले; उनसे श्रवण और श्रवण से दिशाएँ। त्वचा खुली; उससे रोम और रोमों से औषधियाँ तथा वनस्पतियाँ। हृदय खुला; उससे मन और मन से चन्द्रमा। नाभि खुली; उससे अपान और अपान से मृत्यु। जननेन्द्रिय खुली; उससे रेतस्, वीर्य, और रेतस् से जल प्रकट हुआ।
English meaning
It heated that person. As it was heated, the mouth opened like an egg: from the mouth came speech, and from speech fire. The nostrils opened: from them came breath, and from breath wind. The eyes opened: from them sight, and from sight the sun. The ears opened: from them hearing, and from hearing the directions. Skin opened: from skin hairs, and from hairs herbs and trees. The heart opened: from it mind, and from mind the moon. The navel opened: from it apana, and from apana death. The generative organ opened: from it seed, and from seed waters.
व्याख्या
देह का मुख, नासिका, नेत्र आदि यहाँ विश्व के अग्नि, वायु, सूर्य आदि से जोड़े जाते हैं। तपाना सृजन की तीव्रता और आकार के प्रकट होने का कथात्मक रूप है। प्राण तथा अपान इस पाठ की जीवन-शक्तियों की भाषा हैं; इन्हें आधुनिक शरीर-विज्ञान के एक-एक अंग या प्रक्रिया में पूरी तरह बाँधना उचित नहीं।
Explanation
Bodily openings and faculties are paired with fire, wind, sun and other cosmic powers. Heating expresses the intensity of formation and emergence within the story. Prana and apana belong to the text’s account of vital powers; they should not be mapped without qualification onto a single modern anatomical structure or physiological process.
संदर्भ
यह पहले खण्ड का विस्तृत समापन है। आठ अंग-शक्ति-देवता सम्बन्ध अगले खण्ड में उलटे क्रम में शरीर के भीतर प्रवेश करते दिखाई देंगे।
Context
This extended passage closes the first section. Its eight organ–faculty–divinity correspondences return as an entry into the body in the next section.